January 16, 2021

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अयोग्य राज्य सरकार ने खाली किया खजाना, जनता त्रस्त-जयंत सिन्हा

रांची:- कांग्रेस झामुमो की सरकार को अंधेर नगरी चौपट राजा की उपाधि देते हुए भारतीय जनता पार्टी के हजरीबाग सांसद व पुर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि दिशाविहीन हेमन्त सरकार ने खजाना खाली किया है। अपनी अयोग्यता के कारण विफल है जे.एम.एम, कांग्रेस की सरकार। 2020-21 के खराब बजट से कैपेक्स 29.8प्रतिशत घटा और राजस्व व्यय 10.6प्रतिशत बढा। उधार में 8.3प्रतिशत की कमी हुई, किंतु जे.एम.एम. कांग्रेस सरकार द्वारा उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग नहीं किया गया।
2020-21 के बजट में कैपेक्स में 29.8प्रतिशत की कमी आई जिसमें कैपिटल आउटले में 32.7प्रतिशत की गिरावट शामिल है। यह दर्शाता है कि अस्पतालों, सड़को, पुलों जैसी संपत्तियों के निर्माण पर कम खर्च किया गया। ग्रामीण विकास (45प्रतिशत), सिंचाई (45प्रतिशत) और परिवहन (27प्रतिशत) जैसे क्षेत्रों में आवंटन में भारी कमी देखी गई।
उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के समय जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं व इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना चाहिए, सरकार उसके विपरीत कैपेक्स को कम कर चल रही परियोजनाओं को भी लंबित छोड़ रही है। हजारीबाग, दुमका, पलामू, जमशेदपुर के 500 बेड वाले अस्पताल इस विफलता का जीवंत उदहारण हैं। कोविड के दौरान, राज्य सरकार विशेष संसाधन जुटाने में विफल रही। इसके अलावा, उचित संसाधन जुटाए जाने की कमी, सीमित उधारी, विद्यमान ऋण क्षमता के उपयोग में असमर्थता (राजकोषीय घाटा और कर्ज-से-जी.एस.डी.पी. दोनों अनुपात क्रमशः एफआरबीएम 3प्रतिशत और 30प्रतिशत के भीतर है) भी महामारी से निपटने के क्रम में आर्थिक प्रतिक्रिया की कमी का कारण बनी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की राजस्व संरचना इस दुर्दशा का विस्तृत उदाहरण है। केंद्र से मिली प्राप्तियों के बावजूद, राज्य सरकार अपने उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाई है। 2020-21 के लिए कुल राजस्व प्राप्ति 75,309 करोड़ होने का अनुमान है जो 2019-20 के संशोधित ऑकड़ों में 3.4प्रतिशत की वृद्धि है। इसमें से केवल 33,490 करोड़ (44प्रतिशत) राज्य को अपने स्वयं के संसाधनों के माध्यम से जुटाने हैं। जबकि 41,819 करोड़ (56प्रतिशत) केंद्र से अनुदान के रूप में और राज्य के कर के हिस्से के रूप में आएगा।
15वें वित्त आयोग की केंद्र द्वारा राज्यों को हस्तांतरण की श्रेणी के अंतर्गत झारखंड के फंड में 26प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिससे 20,593 करोड़ (वित्तीय वर्ष 19 संशोधित अनुमान) की राशि बढ़कर 25,980 करोड़ हो गयी है। इस प्रकार, कुल मिलाकर, 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें केंद्र द्वारा राज्य में अधिक राशि आवंटन सुनिश्चित कर रही है।

एन.डी.ए. सरकार ने भरा था खजाना और मजबूत आर्थिक स्थिति देकर गयी थी

उन्होंने कहा कि रघुवर दास के एन.डी.ए. सरकार के दौरान, राजस्व प्राप्तियों में लगातार वृद्धि हुई। 2018-19 की तुलना में 2019-20 के लिए राजस्व प्राप्तियों में 29.7प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि के लिए पूंजी प्राप्तियों में भी 28.8प्रतिशत की वृद्धि हुई।
एन.डी.ए. की डबल इंजन सरकार ने राज्य में सुनिश्चित किया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में कर्ज व जी.एस.डी.पी.
अनुपात 30प्रतिशत की सीमा से नीचे, 27.1प्रतिशत की दर पर रहे। इसी दौरान रेवेन्यू सरप्लस दर जी.एस.डी.पी. की 1.91प्रतिशत रही। एफ.आर.बी.एम, एक्ट के तहत झारखंड ने सफलतापूर्वक राजस्व घाटे को खत्म कर आय में वृद्धि की थी। इस दौरान राजस्व घाटा जी.एस.डी.पी. के 2.28प्रतिशत रहा, जो एफ.आर.बी.एम. एक्ट के 3प्रतिशत दर की सीमा के अंदर थी। उन्होंने कहा कि एन.डी.ए. सरकार के रिफॉर्म के कारण पिछले 5 वर्षों में खनन से होने वाले लाभों में लगातार वृद्धि हुई। 2020-21 की अनुमानित खनन रसीद राशि 8,000 करोड़, झारखंड की कुल राजस्व प्राप्ति का 15.6प्रतिशत है। इसके अलावा एन.डी.ए. सरकार के विकासशील उपायों के फलस्वरूप जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट और राष्ट्रीय खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट से 2019-20 का राजस्व संग्रह क्रमशः 1,394 करोड़ और 92 करोड़ था जिसमें पिछले वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई थी।

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