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भारतीय ड्रैगन फ्रूट पहुंचा ब्रिटेन और बहरीन


नयी दिल्ली:- भारतीय ड्रैगन फ्रूट- कमलम पहली बार ब्रिटेन और बहरीन को निर्यात किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को यहां बताया कि विदेशी फलों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, फाइबर और खनिज समृद्ध ‘ड्रैगन फ्रूट’ की एक खेप ब्रिटेन और बहरीन भेजी गयी है। इसे गुजरात और पश्चिम बंगाल के किसानों से प्राप्त किया गया है। ब्रिटेन को निर्यात किए विदेशी फलों की खेप कच्छ क्षेत्र के किसानों से प्राप्त की गई थी। बहरीन को निर्यात ‘ड्रैगन फ्रूट’ की खेप पश्चिम मिदनापुर (पश्चिम बंगाल) के किसानों से प्राप्त की गई थी। इससे पहले जून 2021 में ‘ड्रैगन फ्रूट’ की एक खेप दुबई को निर्यात की गई थी। इसे महाराष्ट्र के सांगली जिले के ताडासर गाँव के किसानों से लिया गया था। भारत में ‘ड्रैगन फ्रूट’ का उत्पादन 1990 के दशक की शुरुआत में आरंभ हुआ और इसे घर के बगीचों में उगाया गया। उच्च निर्यात मूल्य के कारण, विदेशी ‘ड्रैगन फ्रूट’ देश में हाल के वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हो गया है और विभिन्न राज्यों में किसानों ने इसे खेती के लिए अपनाया है। वर्तमान में, ड्रैगन फ्रूट ज्यादातर कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में उगाया जाता है। पश्चिम बंगाल इस विदेशी फल की खेती के लिए नया है।
‘ड्रैगन फ्रूट’ मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, अमेरिका और वियतनाम जैसे देशों में उगाया जाता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है और इसे विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। फल में फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यह ऑक्सीडेटिव तनाव से होने वाली कोशिका क्षति की मरम्मत और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है, और पाचन तंत्र में भी सुधार कर सकता है। चूंकि फल में कमल के समान नोक और पंखुड़ियाँ होती हैं, इसलिए इसे ‘कमलम’ कहा जाता है।

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