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भारतीय बैडमिंटन के लीजेंड नंदू नाटेकर का निधन


पुणे:- भारतीय बैडमिंटन के लीजेंड खिलाड़ी नंदू नाटेकर का बुधवार को यहां निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। नाटेकर 1956 में कोई अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी थे। .छह बार के राष्ट्रीय एकल चैंपियन नाटेकर भारत के लिया अपना पदार्पण 20 साल की उम्र में किया था और थॉमस कप टीम चैंपियनशिप में एक दशक से अधिक समय तक भारत की चुनौती की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक संभाले रखी थी। भारतीय बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष हिमंता बिस्वा सरमा ने नाटेकर को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा,”वह भारतीय बैडमिंटन के बड़े आइकॉन में से एक थे। वह अपने पीछे एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। छह बार के राष्ट्रीय चैंपियन नाटेकर 1956 में अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय थे। हम उन्हें उनके ड्राइव, ड्राप और स्मैश के लिए हमेशा याद रखेंगे। ” महाराष्ट्र के सांगली में 1933 में जन्मे नाटेकर ने टेनिस से अपनी शुरुआत की थी और जूनियर नेशनल फ़ाइनल तक भी पहुंचे थे जो उन्होंने टेनिस लीजेंड रामकुमार रामनाथन के खिलाफ खेला था लेकिन फिर उन्होंने अपना सारा ध्यान बैडमिंटन में करियर बनाने पर लगा दिया।
वर्ष 1961 में पहले अर्जुन अवार्डी बने नाटेकर बैडमिंटन में एक कलाकार की तरह थे जो अपने कौशल और स्ट्रोक में परफेक्शन से विपक्षियों को सम्मोहित कर देते थे। उन्होंने भारतीय बैडमिंटन में 1956 में इतिहास बनाया जब उन्होंने कुआलालम्पुर में सेलंगोर अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीता। उन्होंने और मीणा शाह ने 1962 में बैंकॉक में किंग्स कप इंटरनेशनल में मिश्रित युगल खिताब जीता। एक वर्ष बाद नाटेकर ने इसी टूर्नामेंट में उम्मीदों के विपरीत एकल खिताब जीत लिया। फेडेरशन के महासचिव अजय सिंघानिया ने कहा,”नंदू नाटेकर के निधन की जानकारी मिलने से बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कुआलालम्पुर में अपनी जीत से भारतीयों को यह विश्वास दिया कि वे विदेशों में भी खिताब जीत सकते हैं। भारतीय बैडमिंटन उनके योगदान का हमेशा ऋणी रहेगा । पूरा बैडमिंटन समुदाय दुःख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ है। ” नाटेकर ने 15 वर्षों तक चले अपने करियर में अनेक पुरुष युगल और मिश्रित युगल राष्ट्रीय खिताब जीते और 1954 में आल इंग्लैंड में अपनी एकमात्र उपस्थिति में क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे।

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