April 12, 2021

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हेमंत सरकार के बजट में मानवीय संवेदना के साथ समाज के अंतिम छोर तक पहुंच पाने की कसक -सूर्यकांत शुक्ला

रांची:- 3 मार्च 2020-21 को विधान सभा में पेश झारखण्ड सरकार का सालाना बजट अभी पारण की जरुरी प्रक्रियाओं से गुजर रहा है। हेमंत सोरेन सरकार के वित्त मंत्री डॉ0 रामेश्वर उराव द्वारा सदन में प्रस्तुत बजट वार्षिक आय व्यय विवरणी से आगे बढ़कर एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जिसमें न सिर्फ आय और व्यय का हिसाब किताब है अपितु मानवीय संवेदना के साथ समाज के अंतिम छोर तक पहुंच पाने की कसक है। बजट में न सिर्फ आकार है,बल्कि प्रकार के भी कई स्वरूप हैं। वित्तीय अनुसाशन के साथ वित्तीय साख की चिंता का भी समाधान है।
आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला का कहना है कि कोरोना संक्रमण की अवधि में जब राज्यों की राजस्व आय कम रही है। झारखण्ड के राजस्व आय में कमी आयी है, तथापि आगामी वित्त वर्ष के राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी के 2.83 प्रतिशत के मर्यादित दायरे में सीमित कर पाना सरकार की बड़ी उपलब्धि और वित्तीय अनुशासन का सम्मान है।
कंसोलिडेटेड सिंकिंग फण्ड के लिये कम राजस्व के बावजूद चालू वित्त वर्ष में 303 करोड़ रुपये और आगामी वित्त वर्ष के लिए 472 करोड़ रुपये का बजटीय उपबंध यह बताने के लिये काफी है कि बढ़ते भावी कर्जो के पुनर्भुगतान की चिंता सरकार को है, तभी तो संचित डूब कोष के निर्माण का प्रस्ताव सरकार लेकर आयी है। मालूम हो कि सिंकिंग फण्ड वह कोष है, जिससे सरकार को अपने कर्ज का भुगतान करने में सहूलियत मिलती है।
विकास के प्रति संजीदा सोंच का उदाहरण है, आउटकम बजट की संकल्पना बजट की खासियत है । आउटकम बजट के ऑउटले पर नही बजट के परिणामों को फोकस करता है। परिणामों को लोकदृष्टि में लाता है ,क्रियान्वयन को पारदर्शी बनाता है और मंत्रालयों, विभागों और अधिकारियों को ज्यादा जबाबदेह बनाता है। 11 विभाग, 21 अनुदान की मांग के अंतर्गत आने वाले खर्चों को अभी आउटकम बजट की परिधि में लाया जाना वित्त मंत्री के बजट को एक विशेष अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
वज्रपात की घटनाओं से राज्य में मौतों की खबरें दुखदायी है ।इस दुःख की अनुभूति का स्पर्श बजट में महसूस होता है। झारखण्ड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा ज्योग्राफिकल इनफार्मेशन सिस्टम पोर्टल -मोबाइल एप्प विकसित कर मैसेज के माध्यम से वज्रपात की पूर्व सूचना देने के सिस्टम को मजबूती प्रदान करने के लिये बजटीय उपबंध सराहनीय और मानवीय है।
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के ख्याल से ट्रैफिक पार्क का अधिष्ठापन, कमजोर तबके की महिलाओ द्वारा हंडिया दारू की बिक्री को हतोत्साहित कर जीविकोपार्जन के अन्य जरिये प्रदान करने के लिये फूलों झानो योजना।
फूलों झानो आशीर्वाद योजना के द्वारा 15 हज़ार महिलाओ को रोजगार के दूसरे विकल्पों से जोड़ना, ग्रामीण तंगहाली से निपटने के लिये मनरेगा मजदूरी में 31रुपये की बढ़ोतरी, समेकित बिरसा ग्राम विकास योजना,बिरसा ग्राम योजना,जिसमें लोकल आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि में उत्पादन को बढ़ावा देना, आज़ादी की लड़ाई में शामिल टाना भगत समाज के कल्याण के लिये बजटीय उपबंध आकार में भले ही छोटे दिख रहे हों परन्तु बड़ी सोंच का आगाज करने वाले हैं।
सामाजिक प्रच्क्षेत्र में 33 हज़ार करोड़ रुपये और आर्थिक प्रच्क्षेत्र में लगभग 31हज़ार करोड़ रुपये का बजटीय उपबंध,सरकार की सामाजिक और विकासात्मक चिंता का इज़हार करता हैं।

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