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वैक्सीन के अभाव में राजधानी में सभी सेंटर का बंद रहना केंद्र सरकार की विफलता का परिणाम : कांग्रेस

रांची:- झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और डॉ0 राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सभी को कोविड-19 का टीका निःशुल्क उपलब्ध कराने के दावे की सच्चाई यह है कि आज राजधानी रांची में वैक्सीन के अभाव में वैक्सीनेशन सेंटर बंद है। कोरोना संक्रमण निपटने की तैयारी में केंद्र सरकार की इससे बड़ी कुछ और विफलता नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी विफलता को छिपाने के लिए टीकाकरण जागरूकता अभियान चलाने का दिखावा कर सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रही है, जबकि हकीकत है कि लोग कोविड-19 वैक्सीन लेने के लिए भटक रहे है, लेकिन निःशुल्क की बात को दूर राशि का भुगतान करने पर भी वैक्सीन नहीं मिल रहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्र सरकार की गलत नीतियों और लापरवाह रवैये ने स्थिति को पूरी तरह से बिगाड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जनवरी में जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कोरोना संक्रमण के खतरे के प्रति आगाह किया, तो केंद्र सरकार के मंत्रियों ने उनका मजाक उड़ाया। अब जब राहुल गांधी इससे बचाव के लिए अधिक से अधिक संख्या में वैक्सीनेशन की सलाह दे रहे हैं, तो वैक्सीनेशन की धीमी गति और अपनी विफलता पर पर्दा डालने के लिए भाजपा नेता इस प्रचार में जुटे हैं, लोग टीका लगाने को लेकर जागरूक नहीं है। परंतु सच्चाई यह है कि झारखंड जैसे राज्यों में प्रति दिन ढ़ाई से तीन लाख लोगों को कोविड-19 का टीका देने की व्यवस्था की गयी है, लेकिन केंद्र से प्रतिदिन के हिसाब से मुश्किल से औसतन 50 हजार टीका ही उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं कई दिन तो वैक्सीन के अभाव में टीकाकरण के काम को ही बंद कर देना पड़ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि प्रारंभ में केंद्र सरकार की ओर से गलत आंकड़ा पेश कर यह बताने की कोशिश की गयी है कि झारखंड में सबसे अधिक वैक्सीन की बर्बादी हो रही है,लेकिन राज्य सरकार की ओर से इसका खंडन किया गया और सही आंकड़ा पेश किया गया, तो केंद्र सरकार ने चुप्पी साध ली।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ0 राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि आदिवासी बहुल इलाके में भी लोग बढ़चढ़ कर वैक्सीन लेने के लिए पैदल चलकर टीकाकरण केंद्र पर पहुंच रहे हैं, इनमें कई बुजुर्ग महिला-पुरुष और दिव्यांगजन भी हैं, इसके बावजूद यह भ्रामक और गलत प्रचार किया जा रहा है कि झारखंड में लोग वैक्सीन लेने को इच्छुक नहीं है। सच्चाई एकदम इसके विपरीत है। यदि केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त संख्या में वैक्सीन उपलब्ध करायी जाती, तो झारखंड में अब तक 75 फीसदी से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन का काम पूरा हो गया रहता।

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