April 14, 2021

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बिहार में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में उन्नयन बिहार योजना का कार्यान्वयन शुरू

पटना:- बिहार सरकार ने आज कहा कि माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में उन्नयन बिहार योजना का कार्यान्वयन शुरू किया गया है, जिससे रैंकिंग में सुधार लाई जा सके। विधान परिषद में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के रामचंद्र पूर्वे के एक अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया कि शिक्षा की गुणवत्ता पर नीति आयोग, विश्व बैंक तथा मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा 30 मानकों पर आधारित संयुक्त रूप से तैयार की गई इंडेक्स रिपोर्ट में राज्य की रैंकिंग 17वें स्थान पर है। वहीं, केरल प्रथम स्थान पर है। मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग रैंकिंग में सुधार के लिए कई कदम उठा रही है। वर्ष 2019-20 में राज्य के 5646 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में उन्नयन बिहार योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के शेष सभी 3714 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय, 2948 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय और विभिन्न पंचायतों में कक्षा नौ के पठन-पाठन की व्यवस्था के लिए चयनित विद्यालय में वर्ग कक्ष का निर्माण, अन्य आवश्यक उपकरण और हार्डवेयर का अधिष्ठापन कार्य पूरा कर लिया गया है। श्री चौधरी ने कहा कि राज्य के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक के 30020 तथा प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में 90762 रिक्त पद पर शिक्षकों के नियोजन की कार्रवाई की जा रही है। स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से छात्र एवं छात्राओं के पठन-पाठन के लिए वर्ग नौ एवं 10 की पाठ्यपुस्तक के आधार पर ई कंटेंट का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ग एक से 12 तक की सभी पुस्तकों का ई कंटेंट बिहार टेक्स्ट बुक पब्लिशिंग कारपोरेशन की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया गया है। मंत्री ने कहा कि विद्या वाहिनी ऐप पर वर्ग एक से 12 तक की सभी पुस्तकों का कंटेंट उपलब्ध है, जिसमें छात्र-छात्राओं को नोट्स बनाने की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अकादमी वर्ष 2021-22 में सभी कक्षाओं में तीन महीने का विशेष केचप कोर्स चलाने की तैयारी की जा रही है। श्री चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के संजीव श्याम सिंह के तारांकित प्रश्न के उत्तर में कहा कि उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय अध्यक्षों के 2789 स्वीकृत पद के विरुद्ध उपलब्ध और रिक्त पदों की संख्या 893 है। पुस्तकालय अध्यक्ष के लिए पद का सृजन वर्ष 2007 में हुआ था। उन्होंने कहा कि इस पद के नियोजन की कार्यवाही वर्ष 2008 में शुरू हुई, जो वर्ष 2019 में पूर्ण हो सका। मंत्री ने कहा कि विलंब का मुख्य कारण अभ्यर्थियों द्वारा न्यायालय में विभिन्न याचिकाओं का दायर करना था। वर्ष 2020 में नई नियमावली बनाई गई है और इसके आलोक में पुस्तकालय अध्यक्ष पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी ही पुस्तकालय अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन देने के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय अध्यक्षों की आवश्यकता का आकलन करते हुए अध्यक्ष पात्रता परीक्षा का आयोजन करने के बाद नियुक्ति की कार्रवाई की जाएगी।

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