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धनबाद पुलिस के कई थानेदारों को खटकते हैं ईमानदार पत्रकार , पत्रकार अमित पर पाथरडीह प्रभारी ने दर्ज की रंगदारी व हरिजन एक्ट , धनबाद के पत्रकार हुए एक जुट

DIG बोकारो को किया ट्वीट

धनबाद:- धनबाद पुलिस के कई मलाईदार थानों में पदस्थापित थानेदारो को ईमानदार पत्रकार खटकते हैं। ऐसे पत्रकार उनकी आंखों की किरकिरी बने होते हैं और जब कोई खबर छप जाती है तो थानेदार पहले तो उसे धमकाते हैं और राह पर आ जाने की नसीहत देते हैं और इसके बाद भी ईमानदारी से अपना धर्म निवाहने वाले पत्रकार उनकी धमकी की परवाह नही करते तो फिर होता है ऐसा धिनौना खेल जिससे पुलिस का चेहरा उसकी परिभाषा के विपरीत नजर आने लगता है। पुलिस का शब्दिक अर्थ बड़ी फक्र से यह समझाया जाता है कि पु मतलब पुरूषार्थी, लि मतलब लिप्सारहित व स मतलब सहयेगाी होता है। लेकिन धनबाद की पुलिस के लिये इस अर्थ का कोई मतलब नही रह जाता। यहां पुलिस मतलब साधती है और जब ऐसा नहीं होता तो वह राह के रोड़े को सबक सिखाने के लिये कोई भी पैंतरा आजमाने से बाज नहीं आती। उसे इसकी तनिक भी फिक्र नहीं की इस आचरण से पुलिस की छवि धूमिल होती है। अभी पुलिस के कई थानेदारों के कारनामे धनबाद पुलिस की छवि को दूषित करने के लिये प्रर्याप्त हंै। पुलिस किस तरह से लोगों को फंसाती है। उसे परेशान करने का हथकंडा अपनाती है इसका ताजा उदाहरण है धनबाद के पाथरडीह थाना में दर्ज कराया गया एक मामला। यह मामला कोयलांचल लाईव के पत्रकार अमित कुमार के खिलाफ दर्ज किया गया है और पाथरडीह थाना में यह मामला दर्ज करने के लिये किसी प्रदीप कुमार हाड़ी को मोहरा बनाया गया है। भारतीय दंउ विधान की धारा 385,504,506,34 तथा एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराए गये इस मामले में तीन लोगों को नामजद किया गया है जिसमें अमित कुमार के अलावा राजकुमार सिंह, व सुदर्शन ओझा का नाम शामिल है। आरोप लगाया गया है कि तीनों ने चासनाला आफिस के लेखा कार्यालय के समीप उसे भद्दी भद्दी गालियां दी और हर माह रंगदारी के तौर पर प्रति मजदूर पांच सौ रूपये पहुचाने का फरमान सुनाया। इस आवेदन को मिलते ही बिना सच्चाई का पता लगाए पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर लिया और इसाक अनुसंधान एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को दे दिया गया। दरअसल पुलिस मामला दर्ज करने की हडबड़ी में इसलिये थी कि कुछ दिन पहले पत्रकार अमित ने कई ऐसे समाचार चलाए थे जिसका संबंध सुदामडीह थाना व इसके गौशाला ओपी से रहा था। एक से एक खबर चलने के बाद पुलिस ने पहले तो अमित को रास्ते पर लाने के लिये समझाया। लेकिन जब उसने पुलिस की बात अनुसनी कर दी तो फिर उस पर नकेल कसने के लिये ऐसा घृणित काम किया जिससे पुलिस की छवि धूमिल हो गयी। इस बीच पत्रकार अमित सिंह ने कई ऐसे ऐसे सवाल उठाकर पुलिस के वरीय अधिकारियों को बताया है कि तथ्य से अलग हटकर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का सच क्या है। उसने अपने उपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है और सवाल उठाए है जिससे इस केश का सच सबके सामने आ जायेगा और पुलिस का पैतरा सबके सामने दिखने लगेगा। इस मामले के दर्ज होने के बाद पत्रकारों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और निर्दोष पत्रकार अमित कुमार सिंह को झूठे व मनगडन्त मामले में फंसाने की घटना की जांच कराने की मांग की है। खुद अमित कुमार ने पत्र लिखकर कई अफसरों को पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी है और उस कारण को भी बताया है जिसकी वजह से उसे झूठे मुकदमें में फंसाकर परेशान करने की पुलिस ने साजिश रची है। पत्रकार ने साफ कर दिया है कि कलम को कुन्द करने की काररवाई चाहे पुलिस जितनी कर ले लेकिन वह अपनी साजिश में सफल नही हो सकती। कई पत्रकार संगठनों ने भी हाल के दिनों में धनबाद के कई थानेदारों द्वारा पत्रकारो ंको फंसाने की काररवाई को गंभीरता से लेकर इसके खिलाफ आंदोलन चलाने की तैयारी कर दी है। इससे एक बार फिर धनबाद में पत्रकार आंदोलन की पृष्ठभूमि बनने लगी है। उसी तरह की पृष्ठभूमि जैसी कभी धनबाद के वयोवृद्ध पत्रकार स्व ब्रहमदेव सिंह शर्मा, युवा पत्रकार अशोक वर्मा व सलमान के कारण बनी थी और धनबाद का पत्रकार आंदोलन कई पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरा गया था।

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