अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

हिंदी का स्थानीय भाषाओं से मतभेद या स्पर्धा नहीं: शाह


नयी दिल्ली:- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि राजभाषा हिंदी का किसी भी स्थानीय भाषा से कोई मतभेद नहीं है और ना ही उसकी इन भाषाओं से स्पर्धा है बल्कि वह सह अस्तित्व से ही आगे बढ़ेगी। श्री शाह ने आज यहां आयोजित राजभाषा पुरस्कार वितरण तथा हिंदी दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि जिस समय संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था तो उसके निर्णय के मूल में यह बात कही गयी थी कि हिंदी का किसी भी स्थानीय भाषा के साथ ना कोई मतभेद है और ना ही उसकी इनके साथ स्पर्धा है। श्री शाह ने उसी भावना को दोहराते हुए कहा कि हिंदी सभी भाषाओं की सखी है और वह सह अस्तित्व से ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ये सभी भाषाएं एक दूसरे की पूरक हैं और संविधान सभा ने जिस दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था, उसी दिन अन्य स्थानीय भाषाओं को भी स्वीकार करने का निर्णय लिया गया था। देशवासियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि आज हिंदी दिवस के दिन जहां इस बात का मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए क्या कुछ किया जाना बाकी है, वहीं राज्यों को भी इस बात का मूल्यांकन करना चाहिए कि उन्हें अपनी स्थानीय भाषाओं को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। श्री शाह ने कहा कि भारत विविधाताओं का देश है और हम इस विरासत को संभालकर रखेंगे। अनेक देशों के भाषाओं की लड़ाई हारने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस लड़ाई को कभी हारेगा नहीं और हम युगों तक सभी भाषाओं को संभालकर रखेंगे। उन्होंने कहा कि भाषा ही देश का गौरव बढ़ाती है और हमें यह समझना होगा कि अपनी भाषा का महत्व नहीं समझने वालों को इतिहास में बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।
आजादी के आंदोलनों में स्वराज और स्वदेशी के साथ स्वभाषा के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि कहीं भी अपनी भाषा के इस्तेमाल पर किसी तरह का संकोच नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह दुनिया के सर्वोच्च मंचों पर भी हिन्दी में ही बोलते हैं। विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आपका मूल्यांकन काम के आधार पर होता है न कि भाषा के आधार पर इसलिए राजभाषा हिन्दी के साथ साथ स्थानीय भाषा का भी महत्व समझें और अभिव्यक्ति के लिए इनका बढ़ चढ़ कर इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी भाषा से अच्छी अभिव्यक्ति और किसी भाषा में नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “ अब समय आ गया है युवा मन में बैठा लें कि हम अपनी भाषा नहीं छोड़ेंगे। अभिभावकों को भी इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि वे बच्चों के साथ अपनी भाषा में बात करें वरना तो हम अपनी जड़ों से कट जायेंगे। ” उन्होंने कहा कि भाषा व्यक्तित्व के विकास में बाधक नहीं है।
श्री शाह ने कहा कि राजभाषा विभाग भी हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए इस वर्ष से अनेक विशेष प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह देशवासियों से भी आज एक अपील कर रहे हैं, “आप अपने राज्यों के इतिहास जो स्थानीय भाषा में हैं उन्हें हिन्दी में अनुदित करायें जिससे उसे पूरे देश में पहुंचाया जा सके। सभी को यह जानने का हक है।” उन्होंने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी हिन्दी तथा स्थानीय भाषाओं के महत्व को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किये गये हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी राजभाषा हिन्दी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा, “भारत ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई एकजुट होकर बहुत अच्छी तरह लड़ी। केन्द्र, राज्यों तथा 130 करोड़ देशवासियों ने एकजुट होकर प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करीब तीस बार इस बारे में राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ राजभाषा में संवाद किया। इससे जनता एकजुट हुई।” इससे पहले उन्होंने विजेताओं को राजभाषा कीर्ति पुरस्कार तथा राजभाषा गौरव पुरस्कार प्रदान किये। राजभाषा पुरस्कार हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मंत्रालयों, विभागों और उपक्रमों को तथा राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट लेख और पत्रिकाएं निकालने वाले संस्थानों को दिये जाते हैं। कोरोना महामारी की विषम परिस्थितियों के चलते पिछले वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा सका था इसलिए इस बार वर्ष 2018-19, 2019-20 तथा 2020-21 के लिए भी पुरस्कार प्रदान किये गये। इस मौके पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, अजय कुमार मिश्रा और निशिथ प्रमाणिक के साथ साथ अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

%d bloggers like this: