January 21, 2021

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झारखंड के सबसे बड़े कपड़ा मिल पर लटका ताला

लॉकडाउन में 5000 कामगार सड़क पर आये

राँची:- रांची के खेलगांव और इरबा अवस्थित झारखंड के सबसे बड़ा कपड़ा मिल ओरिएंट क्राफ्ट में पिछले कुछ दिनों से काम नहीं होने के कारण ताला लटका हुआ है। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमणकाल के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान मैनेजमेंट के लोग दिल्ली शिफ्ट कर गए हैं और फैक्ट्री में काम करने वाले लगभग 5000 मजदूर सड़क पर आ गए हैं।
झारखंड की नहीं पूर्वी भारत के सबसे बड़े कपड़ा मिल ओरिएंट क्राफ्ट को लगता है, किसी की नज़र लग गयी। आठ माह पहले पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार की पहल से इसकी शुरुआत हुई थी और यहां से अमेरिका कनाडा और यूरोप के विभिन्न देशों के लिए तरह-तरह के गारमेंट्स का निर्माण किया जाता था। इस मिल का उद्घाटन करने के लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी खुद यहां पहुंची थी मगर मौजूदा समय में कोरोना काल और अन्य दुश्वारियों में फंसकर यह मिल साल भर में ही दम तोड़ रही है जिससे मजदूरों के समक्ष रोटी रोज़गार का संकट पैदा हो गया है।
ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी द्वारा लगभग चौबीस सौ करोड़ रुपये खर्च कर यह भव्य फैक्ट्री बनाई गई थी जिससे बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन भी हुआ। शुरुआत में सबकुछ ठीक ठाक रहा लेकिन पिछले कुछ दिनों से काम नहीं होने के कारण कंपनी में ताला लटका हुआ है। मैनेजमेंट के लोग दिल्ली शिफ्ट कर गए हैं और फैक्ट्री में काम करने वाले लगभग 5000 मजदूर सड़क पर आ गए हैं। लॉकडाउन और सरकारी मकड़जाल में फंसकर यह फैक्ट्री साल भर में ही दम तोड़ रही है। इससे क्षेत्र के कामगार काफी व्यथित है और सरकार से जल्द से जल्द इसे खुलवाने की मांग कर रहे हैं।
इधर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी कंपनी के खराब होते हालात से चिंतित और व्यथित हैं । उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन के वास्ते साल 2016 में नयी टेक्सटाइल नीति बनायी थी ताकि राज्य में पूंजीनिवेश को बढ़ावा मिल सके।
इसमें कोई संदेह नहीं की झारखंड में औद्योगिक विकास की असीम संभावनाएं हैं यहाँ पर हर तरह के निर्माण के लिए बहुतायत में कच्चा माल उपलब्ध हैं और इन के मूल्य संवर्धन के लिए यहाँ के मेहनतकश कामगार भी अपना पसीना बहाने को तैयार हैं आवश्यकता है केवल राज्य सरकार से प्रोत्साहन मिलने की जिससे ओरिएंट क्राफ्ट जैसी फैक्ट्री फिर से प्रदेश के औद्योगिक विकास में अपना योगदान दे सके ।

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