January 20, 2021

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

हाल-ए-बीसीसीएल… सुख भरे दिन गयो रे भैया, अब तो चाय-नाश्ते पर भी आफत

एक्सक्लूसिव ऑक्शन ने बीसीसीएल की भद पिटवा दी। फ्लोर प्राइस पर भी कोयला नहीं बिका। वजह खराब गुणवत्ता। फिर इस मुद्दे पर की गई इतनी कसरतों का क्या?

धनबाद:- बीसीसीएल कर्मियों के चाय-नाश्ते पर इन दिनों आफत आ गई है। कोयला भवन में चलने वाली कैंटीन की समय सीमा समाप्त हुई। उम्मीद थी कि यह बढ़ेगी पर कास्ट कङ्क्षटग को प्रतिबद्ध मौजूदा डीपी ने और बढ़ाने से इन्कार कर दिया। नतीजा कैंटीन बंद हो गई। कोयला नगर के अधिकारी-कर्मचारी पशोपेश में हैं, आखिर करें भी क्या। ऐसे वक्त पर जब खदान बंद होने पर भी हल्ला नहीं होता कैंटीन भला क्या चीज है। पर इसकी याद बहुत आती है। आए भी क्यों नहीं, 35 रुपये में भरपेट शाकाहारी, 50-70 रुपये में मांसाहारी भोजन और चार रुपये में बेहतरीन चाय कहां मिलेगी। उसकी याद में वे आह भर उठते हैं। आपस में बतियाते हैं कि वे दिन भी क्या थे। लॉकडाउन में वही एक मात्र सहारा थी। तीन महीने का कैंटीन को एक्सटेंशन दे देते तो क्या हो जाता? इस दौरान टेंडर कर लेते।

पत्थर खदान से कोयला कैसे निकले

एक्सक्लूसिव ऑक्शन ने बीसीसीएल की भद पिटवा दी। फ्लोर प्राइस पर भी कोयला नहीं बिका। वजह खराब गुणवत्ता। फिर इस मुद्दे पर की गई इतनी कसरतों का क्या? कारोबारियों की मानें तो सब दिखावटी है। पत्थर खदान से कोयला थोड़े न निकलेगा। अच्छी गुणवत्ता की खदानों पर कंपनी की चलती कहां है। कुइयां कोलियरी को ही लीजिए, यहां का कोयला उत्तम गुणवत्ता का है। बावजूद वहां के कोयले के लिए ऑफर नहीं दिया गया। वजह सत्ता परिवर्तन। नए विधायक के समर्थकों ने तय कर दिया कि सुविधा शुल्क उनके पास आए, तब कोयला लोड होगा। तीन महीने से रोड सेल के लिए कोयला नहीं उठा। विवाद जारी है। विश्वकर्मा प्रोजेक्ट से तो दो साल हो गए रोड सेल बंद हुए। यहां बेहतर गुणवत्ता का कोयला है। यह भी दो विधायकों के पेच में है। बाघमारा की बात तो भइया किसी से छुपी नहीं।

चार महीने से बंद हार्डकोक उद्योग अभी ठीक से खुले भी नहीं कि छापा पड़ गया। जब एक भ_ा पर छापा पड़ रहा था, उस दौरान भी कोयला लदा वाहन प्रवेश कर रहा था। इतना बेधड़क धंधा। फिलवक्त तो यहां सही कागजात से हो रहा था, लेकिन जहां पहले हो रहा था, वहां खेल हो जाता था। सो यहां ट्रक पहुंचा कि सूचना बड़े साहब तक। पुलिस टीम धमक पड़ी। सही है अतीत का साया पीछा नहीं छोड़ता। फिलहाल कोयला ईसीएल के हवाले है। मामला अदालत में। कारोबारियों के बेदाग होने की बातें हो रही हैं। बावजूद प्रशासन की अतिरिक्त सतर्कता ने लॉकडाउन में ढील से भ_ा खोलने का मन बना रहे कारोबारियों को हिला दिया है। मन परेशान काम करें कि नहीं। स्थानीय स्तर पर अच्छा कोयला मिल नहीं रहा, बाहर से लाओ तो छापेमारी। कोई खतरा क्यों उठाए

बीसीसीएल प्रबंधन ने एक वेबिनार किया। मुद्दा वही जो हमेशा होता रहता है। उत्पादन व डिस्पैच बढ़ाना। सो इस बार भी वही था। मूल कारण गुणवत्ता की कमी की शिकायतों पर जवाब तलब करना था। सो जमकर हिसाब-किताब किया गया। हर किसी को गुणवत्ता सुधारने का टास्क भी दिया गया। यह भी बताया गया कि लॉकडाउन का बहाना अब नहीं और चलेगा। शिद्दत से काम पर लौटना है। एक लाख टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य था। इसे जितना जल्द पा लें उतना ठीक अन्यथा झेलना होगा। चेतावनी दी गई कि यह कंपनी का नहीं मंत्रालय का आदेश है। आदेश की अवहेलना की तो…। क्षेत्रीय प्रबंधकों ने बेहतर करने का आश्वासन दिया। हालांकि उच्च प्रबंधन इससे संतुष्ट नहीं था। हर क्षेत्र के जिम्मे 17-17 हजार टन कोयला उत्पादन प्रतिदिन का लक्ष्य बांध दिया गया। वेबिनार से क्षेत्रीय महाप्रबंधकों समेत परियोजना पदाधिकारियों को भी तलब किया गया था।

Recent Posts

%d bloggers like this: