June 21, 2021

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टीएसी में संशोधन के पहले राज्यपाल से विचार विमर्श करना चाहिए-आशा लकड़ा

रांची:- रांची नगर निगम की पूर्व मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि टीएसी के नियमावली में संशोधन करने से पूर्व राज्यपाल से विचार-विमर्श करना चाहिए था। परन्तु मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस निर्णय से यही आभाष हो रहा है कि उन्होंने जेएमएम की सोची- ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी (टीएसी) की नियमावली में संशोधन कर जेएमएम ने संवैधानिक पद की गरिमा को तार-तार कर दिया है। राज्यपाल संवैधानिक पद पर हैं। राज्य सरकार की शासन व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना उनकी जिम्मेदारी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की बातों को ध्यान में रखते हुए उन्हें संवैधानिक प्राविधानों के तहत राज्य के हित मे निर्णय लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सोमवार को जेएमएम ने टीएसी की नियमावली में किए गए संशोधन को लेकर राजभवन पर अमर्यादित आरोप लगाए। उनकी बातों से यह स्पष्ट हो चुका है जेएमएम ने सोची-समझी साजिश के तहत टीएसी की नियमावली में संशोधन किया है। मेयर ने कहा कि टीएसी के चेयरपर्सन के लिए मुख्यमंत्री का आदिवासी होने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है, परंतु इस राज्य में सीएम का पद सिर्फ आदिवासी के लिए ही आरक्षित नहीं किया गया है। यदि भविष्य में झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री गैर आदिवासी होंगे तो क्या वे टीएसी के चेयरपर्सन नहीं हो सकते। जेएमएम के इस बयान से बहुत बड़ी आदिवासी विरोधी साजिश किए जाने की बू आ रही है। मेयर ने यह भी कहा कि जेएमएम में बैठे मठाधीशों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गलत सलाह देकर न सिर्फ राज्यपाल महोदया के संवैधानिक अधिकार का हनन किया है, बल्कि टीएसी को पंगु बनाने की साजिश की है। जेएमएम की ओर से बयान दिया गया है कि टीएसी के गठन से संबंधित फाइल दो बार राजभवन भेजी गई, जिसमें कमेटी के सदस्यों की सूची भी थी, परंतु राज्यपाल महोदया ने उसे अस्वीकृत कर फाइल वापस भेज दिया। जेएमएम को यह भी बताना चाहिए कि टीएसी के लिए नामित सदस्यों की सूची में किसके-किसके नाम थे और राज्यपाल महोदया को किस-किस नाम पर आपत्ति थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि टीएसी के लिए नामित सदस्यों की सूची में दागी लोग भी शामिल थे। मेयर ने कहा कि पांचवीं सूची के रूल-5 में किए प्रावधान पर राज्य सरकार को संसोधन करने का ताकत नहीं है। रूल 4 का सबरूल 3 के प्रावधानो से स्पष्ट है कि टीएसी के सदस्यों के मनोनयन का अधिकार सिर्फ और सिर्फ राज्यपाल को ही है।

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