अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

कोविड प्रभाव से निपटने के लिए औपचारिक रोजगार पर जोर दे सरकार


नयी दिल्ली:- श्रम पर संसद की एक स्थायी समिति ने कहा है कि श्रम बाजार पर कोविड महामारी के प्रभाव से निपटने के लिए सरकार को अनौपचारिक रोजगार क्षेत्र को औपचारिक राेजगार क्षेत्र में परिवर्तित करने पर जोर देना चाहिए जिससे उत्पादकता में वृद्धि हो सके और राेजगार के नये अवसर सृजित होने के साथ साथ आजीविका के मौजूदा साधनों काे मजबूती दी जा सके।
संसद में मंगलवार को पेश ‘संगठित एवं असंगठित क्षेत्र में कोविड के प्रभाव से आजीविका और नौकरी की हानि एवं बढ़ती बेरोजगारी’ रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के प्रभाव से निपटने के लिए रोजगार और आजीविका अर्जन के अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक क्षेत्र में बदलने पर जोर दिया जाना चाहिए। इससे उत्पादकता में वृद्धि होगी और बढ़ती बेरोजगारी पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
समिति ने कहा कि सरकार को सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना चाहिए और इन्हें आकर्षक बनाना चाहिए। इसके अलावा अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों के बैंक खाताें में सीधा धन भेजने के कुछ और तरीके खोजे जाने चाहिए। इससे असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर कोविड प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी।
उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारों को इससे संबंधित याेजनाओं और रियायतों को लुभावना बनाना चाहिए और कौशल विकास केंद्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे ये केंद्र कुशल और प्रशिक्षित कामगार तैयार कर सकेंगे। इन कदमों से रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी। समिति ने कहा है कि सरकार को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वंचित तबकों को मदद देने के लिए एक और दौर शुरु करना चाहिए। जन कल्याण की योजनाओं का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए और उन्हें अक्षरश: लागू किया जाना चाहिए। इससे उन गरीब लोगों की मदद हो सकेगी जिन्हें लॉकडाउन के कारण अपना रोजगार छोड़ना पड़ा है।
कामगारों के लिए स्वास्थ्य सेवा का बुनियादी ढ़ांचा मजबूत करने की सिफारिश करते हुए समिति ने कहा है कि सभी को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार की कानूनी बाध्यता होनी चाहिए।
कोविड महामारी के दौरान रोजगार खत्म होने के वास्तविक आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया की सराहना करते हुए समिति ने कहा कि इसे दौरान नौकरी से निकाले गये कामगारों को सरकार को कानूनी मदद उपलब्ध करानी चाहिए। सरकार को ऐसे मामलों में स्वत् संज्ञान लेना चाहिए और नियोक्ता और कागमार के बीच विवाद में हस्तक्षेप करना चाहिए।
दिल्ली, छत्तीसगढ़, असम और पश्चिम बंगाल में ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ योजना लागू नहीं होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस संबंध में तत्काल कदम उठाने चाहिए। इससे इन राज्यों में कामगारों को लाभ मिल सकेगा।

%d bloggers like this: