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एक नयी सुबह का

मत्स्य प्रजनकों के अनुवांशिक उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

हजारीबाग:- हजारीबाग जिले में डा0 महापात्रा (डीआईजी आईसीएआर), डा0 जे0 के0 जैना (डीडीजी आईसीएआर), डा0 कुलदीप कुमार नायक (निदेशक एनबीजीएफआर) एवं डा0 हींगनाथ द्विवेदी निदेशक मत्स्य, झारखण्ड सरकार के उपस्थिति में नेशनल ब्यूरो ऑफ जेनेरिक रिसर्च लखनऊ,उत्तर प्रदेश से आये डा0 आदित्य कुमार, वैज्ञानिक, आईसीएआर एवं उनकी टीम के द्वारा दो दिवसीय प्रशिक्षण तथा ब्रुडर स्टॉक (प्रजनकों के अनुवांशिक उन्नयन हेतु मत्स्य मिल्ट हिमपरिरक्षण का डेमोस्ट्रेशन किया गया। उन्होंने बताया कि मत्स्य हैचरियों में उत्पन्न बीजो के संवर्धन कर पुनः उसे प्रजनक के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिस कारण मछलियों में इनब्रिड्रिंग डिप्रेशन की संभावना बनी रहती है एवं इन्ही मछलियों का प्रयोग जिले एवं राज्य में मत्स्य उत्पादन में किया जाता है। इनब्रिडिंग डिप्रेशड मछलियों में भविष्य में कई तरह की समस्याओं की संभावना बनी रहती है। उन्होंने बताया कि पूर्व के दिनों में गंगा नदी अथवा अन्य नदियों से मछली के अण्डों का संग्रहन का कार्य कर सभी जिलों में मत्स्य बीज उत्पादन के लिए भेजा जाता था। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए एनबीजीएफआर के वैज्ञानिकों के द्वारा गंगा नदी के नर प्रजनकों का मिल्ट का संग्रहन कर उन्हें क्रायोप्रिजब्ड किया एवं उसी मिल्ट को हजारीबाग के देवानंद फिश फार्म, बरसोत, बरही में प्रयोग कर प्रजनकों के नस्ल सुधार हेतु हजारीबाग के हैचरी संचालकों के समक्ष डेमोस्ट्रेशन का कार्य किया गया।
मौके पर टीम के वैज्ञानिकों के द्वारा कार्यो मिल्ट से मत्स्य बीज उत्पादन के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई तथा गंगा नदी के मछलियों के नर प्रजनक से प्राप्त मिल्ट (शुक्राणु) को बिरेन्द्र प्रसाद के मत्स्य फार्म के मादा मत्स्य प्रजनक के अंग से प्रजनन कराया गया। जिसमें कतला में लगभग 33 प्रतिशत एवं रोहू में लगभग 55 प्रतिशत तक निषेचन का आकलन किया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ये मछलियॉ बडी होकर उन्नत किस्म के प्रजनक के रूप में विकसित होगें, जिससे झारखण्ड के मत्स्य पालको को गुणवतापूर्ण बीज उपलब्ध हो पायेगा।
इस अवसर पर शंभु प्रसाद यादव, सहायक मत्स्य निदेशक,मत्स्य निदेशालय,रॉची के द्वारा आईसीएआर के डीडीजी तथा एनबीएफजीआर के निदेशक तथा लखनऊ से आये वैज्ञानिको को इस कार्य के सफलतापूर्वक सम्पादन हेतु धन्यवाद दिया गया। इस अवसर पर मत्स्य हैचरी संचालको ने पूरी प्रक्रिया को समझाया तथा भविष्य में इसका लाभ प्रजनक विकसित कर जिले में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज संर्वधन हेतु किया जायेगा।
इस मौके पर जिले के मत्स्य प्रसार पर्यवेक्षक, राजकुमार तुरी एवं सभी मत्स्य हैचरी संचालक उपस्थित रहें।

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