May 11, 2021

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पूर्व विधायक नियेल तिर्की का निधन, रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में ली अंतिम सांस

मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा समेत अन्य ने शोक जताया, कांग्रेस भवन में श्रद्धांजलि दी गयी

रांची:- सिमडेगा के पूर्व विधायक और एकीकृत बिहार में पूर्व मंत्री रहे नियेल तिर्की का बुधवार को रांची में निधन हो गया। सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1995, 2000 और 2005 में निर्वाचित हुए नियेल तिर्की ने बुधवार दिन के 11 बजे के करीब रांची स्थित रिम्स के ट्रामा सेंटर में अंतिम सांस ली। रांची स्थित कांग्रेस भवन में एक शोकसभा कर पूर्व विधायक को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ0 रामेश्वर उरांव समेत अन्य नेताओं-कार्यकर्त्ताओं ने उन्हें भावनीनी श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सिमडेगा के पूर्व विधायक नियेल तिर्की के निधन पर दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने परमात्मा से उनकी आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को दुःख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने नियल तिर्की के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की और परिजनों के प्रति गहरी संवेदना जतायी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ0 रामेश्वर उरांव ने नियेल तिर्की के निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि अलग झारखंड राज्य से संघर्ष और बिहार विधानसभा में अलग झारखंड राज्य गठन को लेकर विधेयक पारित कराने में नियेल तिर्की की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने जोरशोर से अलग राज्य की वकालत की और अलग झारखंड राज्य गठन के लिए उन्होंने मंत्री पद त्यागना भी उचित समझा।
नियेल तिर्की ने पहली बार वर्ष 1995 में जेएमएम टिकट पर चुनाव जीता, लेकिन दूसरी बार 2000 में सिमडेगा में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव में जीत हासिल की और एकीकृत बिहार में उन्हें मंत्री भी बनाया गया। बाद में अलग झारखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। इस बीच वर्ष 2005 में नियेल तिर्की सिमडेगा सीट से दूसरी बार कांग्रेस विधायक के रूप में चुने गये। 2009 के ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने नियेल तिर्की को खूंटी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार मिली थी। लेकिन 2014 के चुनाव में खूंटी से कालीचरण मुंडा को टिकट दिए जाने से नाराज नियेल तिर्की ने पार्टी छोड़ दी और खूंटी से आजसू पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर गए।लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में उनकी कांग्रेस में वापसी हो गयी।

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