January 25, 2021

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कृषि सुधार कानूनों से खुश हैं किसान : गिरिराज

भागलपुर:- केन्द्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने दावा किया कि ऐतिहासिक कृषि सुधार कानूनों का कई किसान संगठनों ने स्वागत किया है और वे इस कानून से बहुत खुश हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता श्री सिंह ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इन तीन कृषि कानूनों से किसानों में एक नई उम्मीद जगी है।

देश के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे किसानों के उदाहरण भी लगातार मिल रहे हैं जिन्होंने इस नए कानून का लाभ उठाना शुरू भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन कृषि सुधारों का दूसरा पक्ष यह भी है कि कुछ किसान संगठनों में इस कानून को लेकर भ्रम पैदा कर दिया गया है। उनका कर्तव्य है कि हर किसान का भ्रम दूर कर उनकी चिंताओं को समाप्त कराये। श्री सिंह ने कहा कि उनका दायित्व है कि सरकार और किसानों के बीच दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में जो झूठ की दीवार बनाने की साजिश रची जा रही है उसकी सच्चाई आपसब के सामने रखें। उन्होंने कहा, “मैं खेती की बारीकियां और खेती की चुनौतियां दोनों को ही देखते हुए, समझते हुए बड़ा हुआ हूं। खेत में पानी देने के लिए देर रात तक जागना, पानी चलते समय मेड़ का टूट जाने पर उसे बंद करने के लिए भागना और असमय बारिश का डर वहीं समय पर बारिश की खुशी। इन सब परिस्थितियों से मैं वाकिफ हूं। फसल कटने के बाद उसे बेचने के लिए हफ्तों का इंतजार भी करते हुए किसानों को देखा है।” भाजपा नेता ने कहा कि विपक्षियों के द्वारा झूठ फैलाया जा रहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो रही है, कृषि मंडियां बंद की जा रही हैं। किसानों की जमीन खतरे में है। किसानों पर किसी भी प्रकार के बकाए के बदले कांट्रैक्टर्स जमीन हथिया सकते हैं। किसानों को भुगतान नहीं किया जाएगा। किसान कॉन्ट्रैक्ट को खत्म नहीं कर सकते हैं। पहले कभी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की कोशिश नहीं की गई। इन नए कानूनों को लेकर कोई सलाह मशविरा या चर्चा नहीं की गई है। वहीं, सच्चाई यह है कि एमएसपी व्यवस्था जारी है, और जारी रहेगा। कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) मंडियां कायम रहेगी। ये मंडियां इस कानून की परिधि से बाहर है।
श्री सिंह ने कहा कि करार फसलों के लिए होगा न कि जमीन के लिए। सेल, लीज और गिरवी समेत जमीन के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण का करार नहीं होगा। परिस्थिति चाहे जो भी हो, किसानों की जमीन सुरक्षित है। कृषि करार में कृषि उपज का खरीद मूल्य दर्ज किया जाएगा। किसानों का भुगतान तय समयसीमा के भीतर करना होगा अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी और जुर्माना लगेगा। किसान किसी भी समय बगैर किसी जुर्माना के कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर सकते हैं। कई राज्यों ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की मंजूरी दे रखी है। कई राज्यों में तो कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग संबंधित कानून तक है। दो दशकों तक विचार-विमर्श होने के बाद साल 2000 में शंकरलाल ग्रुप कमेटी से इसकी शुरुआत हुई थी।
भाजपा नेता ने कहा कि उसके बाद 2003 में मॉडल एपीएमसी अधिनियम, वर्ष 2007 की एपीएमसी नियमावली, वर्ष 2010 में हरियाणा, पंजाब, बिहार एवं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की समिति एवं 2013 में 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों की संस्तुति, वर्ष 2017 का मॉडल एपीएमसी अधिनियम और आखिरकार 2020 में संसद द्वारा इन कानूनों को मंजूरी मिली। उन्होंने किसानों को आश्वासन देते हुए कहा कि मंडिया चालू हैं और चालू रहेंगी। एपीएमसी को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ-साथ खुला बाजार आपको अपने घर पर ही अपनी उपज को अच्छे दामों पर बेचने का विकल्प भी देगा। साथ में खेत से मंडी तक अनाज ले जाने का भाड़ा भी बचाएगा। फिर मंडी का विकल्प तो है ही। कृषि मंडी पहले की तरह काम करती रहेगी।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। इन्हें आने वाले समय में और आधुनिक बनाया जाएगा। जिन लोगों की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है वह लोग पूरी तरह से झूठ फैला रहे हैं कि किसानों की जमीन छीन ली जाएगी। जब किसान और व्यापारी के बीच करार सिर्फ उपज का होगा तो जमीन कैसे चली जाएगी। नए कानून में साफ उल्लेख है की किसान का मालिकाना हक बरकरार रहेगा। जो सरकार गांव में रहने वाले हर परिवार को स्वामित्व योजना के जरिए उसके घर का भी मालिकाना हक प्रदान कर रही है वह किसानों की एक इंच जमीन भी किसी को छीनने नहीं देगी। हमारी सरकार नीयत और नीति दोनों से किसान के लिए प्रतिबद्ध है।

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