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बदलती चुनौतियों से निपटने में पुलिस को सक्षम बनाएं पुलिस अनुसंधान ब्यूरो: शाह


नई दिल्ली:- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि अगला एक दशक देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है इसलिए पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपी आर एंड डी) को पुलिस बलों को आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में हर तरह से सक्षम बनाने की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है। श्री शाह ने आज यहां बीपी आर एंड डी के 51 वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के हाथों में है जबकि विभिन्न केंद्रीय पुलिस बल सीमाओं की निगरानी मुस्तैदी से कर रहे हैं। उन्हें यह कहने में कोई संकोच नहीं है की देश बहुत सलामत हाथों में है।
उन्होंने कहा कि भारत बहुत तेजी से 50 खरब रुपए की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए विभिन्न स्तर पर प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में हमारे पुलिस बालों को बढ़ती और निरंतर बदलती चुनौतियां से निपटने के लिए हमेशा मुस्तैदी और ताकत के साथ तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि ब्यूरो को इस मामले में राज्यों की पुलिस और केंद्रीय पुलिस बलों को हर तरह से सक्षम बनाकर तथा उनकी क्षमता निर्माण करने में आगे बढ़कर महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। श्री शाह ने कहा कि जब इस ब्यूरो की स्थापना की गयी थी, उस समय जो चुनौती सबसे बड़ी थी, वे अब संभवत छोटी हो गयी हैं और उनकी जगह साइबर, ड्रोन, जाली मुद्रा, नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों ने ले ली है। इनसे निपटने के लिए हमारे पुलिस बलों तथा एजेन्सियों को बहुत तेजी से सक्षम बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसी तरह ब्यूरो को एक और दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है और वह है सीमाओं की सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए केन्द्रीय पुलिस बलों के अभियानगत कौशल यानी ऑपरेशनल स्किल को बढ़ाना। भले ही यह अभी ब्यूरो के चार्टर में नहीं है, लेकिन सरकार इसके लिए बदलाव करेगी और ब्यूरो को यह काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने भू और समुद्री सीमा की सुरक्षा के क्षेत्र में काम को नितांत जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि ब्यूरो को पुलिस सुधारों को भी वास्तव में ही अमली जामा पहनाने के लिए आगे काम करना होगा और इन सुधारों को संस्थागत रूप देना होगा। पुलिसिंग में बीट व्यवस्था को बेहद अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए, उन्होंने कहा कि इसमें बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का समावेश किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनेकों अप्रासंगिक कानूनों को बदला है जिनमें एनआईए एक्ट और यूएपीए जैसे कानून भी शामिल हैं। साथ ही अनेकों गैर जरूरी और बाधा पहुंचाने वाले कानूनों को निरस्त किया गया है। एक बड़ा काम जम्मू-कश्मीर से संबंधित धारा 370 और 35 ए को निरस्त कर किया गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में बदलाव का व्यापक काम भी कर रही है और यह काम पिछले दो वर्षों से चल रहा है। ब्यूरो की भी इसमें ठीक तरीके से बदलाव किये जाने में महत्वपूर्ण तथा व्यापक भूमिका है।
उन्होंने कहा कि ब्यूरो को एक और महत्वपूर्ण काम की ओर ध्यान देना है और वह है पुलिस की छवि सुधारने का। ब्यूरो के महानिदेशक से उन्होंने कहा कि यह काम उसके क्षेत्राधिकार में आता है और ब्यूरो को इसके लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि बीट कांस्टेबल जो नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित कर लोकतंत्र को सफल बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है, उसे इससे संबल मिलेगा। सरकारी महकमे में पुलिस के काम को सबसे कठिन और दुरूह बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से पुलिस की छवि को खंड-खंड करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और ब्यूरो को इस छवि को सुधारने की दिशा में काम करना होगा। आजादी के बाद से अब तक 35 हजार पुलिसकर्मियों के बलिदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह बात लोगों तक पहुंचायी जानी चाहिए। राज्य सरकारों को भी पुलिस स्मारकों को पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
कोरोना महामारी के दौरान पुलिस के काम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के तथा अन्य सामुदायिक कामों पर वृत्तचित्र बनाकर लोगों तक पुलिस के कामों को पहुंचाया जाना जरूरी है।

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