January 18, 2021

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झारखंड में निजी हाथों में जाएगा बिजली वितरण, सरकार लागू करेगी पीपीपी मॉडल

राँची:- झारखंड में बिजली वितरण और बिलिंग निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। फिलहाल राज्य ऊर्जा विकास निगम की कंपनी बिजली वितरण निगम के जिम्मे यह काम है। 2014 में अस्तित्व में आने के बाद से ही कंपनी का समग्र तकनीकी एवं वाणिज्य घाटा (एटी एंड सी लास) अधिक है। ऐसा कम बिलिंग और राजस्व संग्रह की वजह से हो रहा है।

इसके कारण संचालन और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन में परेशानी आ रही है। विद्युत वितरण में सुधार के लिए इस क्षेत्र में व्यापक पूंजी निवेश के साथ-साथ बेहतर प्रबंधन और संचालन क्षमता में सुधार के लिए किए गए अध्ययन में निजी साझेदारी को बेहतर विकल्प बताया गया है। इस बाबत विश्व बैंक की परामर्शी एसबीआइ कैपिटल मार्केट्स ने झारखंड बिजली वितरण निगम में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल का अध्ययन कर कांसेप्ट नोट तैयार किया है।

इसमें पीपीपी के विभिन्न बिजनेस माडल और इसमें से बेहतर माडल का सुझाव दिया गया है। कांसेप्ट नोट के आधार पर निगम की 37वीं बोर्ड मीटिंग में इस बाबत प्रस्ताव तैयार कर एक समिति गठित की गई। गौरतलब है कि दिल्ली समेत राजस्थान, ओडिशा, मुंबई समेत अन्य बड़े शहरों में इस माडल पर बिजली की आपूर्ति की जा रही है।

रांची व जमशेदपुर एरिया बोर्ड से शुरुआत

सैद्धांतिक तौर पर राज्य के दो विद्युत एरिया बोर्ड रांची और जमशेदपुर में पीपीपी मोड में वितरण लाइसेंसी की बहाली को स्वीकृति दी गई है। इसके लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किए जाएंगे जो कानूनी, मानव संसाधन और वित्तीय प्रबंधन पर दस्तावेज तैयार करेंगे। नए लाइसेंसी की बहाली के लिए झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की स्वीकृति ली जाएगी।

पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए पांच सदस्यीय राज्यस्तरीय समिति बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष विकास आयुक्त, जबकि सदस्यों में ऊर्जा विभाग और योजना सह वित्त विभाग के सचिव समेत झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी और बिजली वितरण निगम के एमडी होंगे।

पीपीपी मोड के तहत विद्युत वितरण लाइसेंसी माडल लागू करने के लिए निविदा मूल्यांकन समिति का भी गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष ऊर्जा विभाग के अपर सचिव होंगे। जबकि सदस्यों में ऊर्जा विभाग के मुख्य विद्युत अभियंता, बिजली वितरण निगम के मुख्य विद्युत अभियंता और ऊर्जा संचरण निगम के मुख्य विद्युत अभियंता होंगे।

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