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श्री दिगंबर जैन पंचायत की नयी कार्यकारणी का चुनाव 26 को, 32 सदस्य आजमाएं अपना भाग्य


रांची:- श्री दिगंबर जैन पंचायत कर नयी कार्यकारणी 2021-22 के 21 सदस्यी कार्यकारणी का चुनाव 26 सितंबर हो रातू रोड स्थित रतनलाल जैन स्मृति भवन में होगा। इस बार चुनाव में 32 सदस्य अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। इसमें अजय गंगवाल, अजिता काला, अरुण अजमेरा, आकाश सेठी, कमल सेठी, कैलाश बड़जात्या, कैलाश पांड्या, धर्मेद्र छाबड़ा मंटू, पदम छाबड़ा, पंकज पांड्या, प्रदीप वाकलीवाल, प्रमोद झांझरी, मनोज काला, राकेश काशलीवाल, राकेश गंगवाल पीकु, रामपाल गंगवाल, संजय छाबड़ा, संजय पाटनी, सुभाष विनायका, सुनील सेठी, हेमंत सेठी चुनाव मैदान में हैं। श्री दिगंबर जैन पंचायात के चुनाव के पहले प्रदीप जैन काला द्वारा जागो जैन समाज जागों व्हटसएप ग्रूप बनाकर वर्तमान समय में चुनाव में अपनी किस्मत अजमाने वाले प्रत्याशियों और पूर्व के कई पदाधिकारियों से कई सवाल किए हैं। इसमें मंदिर परिसर की दुकान नंबर एक के संबंध में समाज के सम्मानित सदस्य गण मंदिर की दुकान नंबर 1 का मामला मुझे पहली बार तब पता चला जब यह बात कार्यकारिणी में आई।
बताया गया कि यह दुकान 15 से 20 साल पहले पवन कुमार छाबड़ा को दी गई थी, वह लापता हो गए, दुकान उनके पिता चिरंजीलाल छाबड़ा ने मंदिर को नहीं लौटा कर अपने कब्जे में ले लिया और पवन कुमार जैन के नाम से ही नाम मात्र का भाड़ा देते हुए कब्जे दार बन गए। यहां तक भी बहुत समस्या नहीं थी। कालांतर में इस परिवार ने दुकान को अपने उपयोग में न रखकर पैसा कमाने के लिए अन्य व्यक्तियों को भाड़े पर चढ़ा दिया। ऐसा करना सर्वथा गलत है। आप किसी भी प्रकार से किराए की दुकान जो कि आपके नाम से किराए पर भी नहीं है उसे किसी दूसरे को किराए पर नहीं दे सकते थे। छपरा परिवार के द्वारा कभी यह दुकान किसी कोरियर वाले को भाड़े पर दी गई, कभी किसी मिठाई वाले को दी गई और शायद एक बार यह दुकान किसी टायर वाले को भी भाड़े पर दी गई थी। अंततः यह दुकान आज से लगभग 11 साल पहले जैन स्टोर को छाबड़ा परिवार के द्वारा अनधिकृत रूप से दादागिरी करते हुए भाड़ा पर दिया गया। जैन स्टोर को बताया गया कि यह दुकान उन्हें ऑक्सन पर मिली है और इसलिए जैन स्टोर पहले चिरंजीलाल छाबड़ा को और बाद में उनके पुत्र राजकुमार छाबड़ा को लगातार हर माह भाड़ा देता चला रहा है। मेरे गले यह बात एकदम से नहीं उतर रही है कि इतने वर्षों तक इस दुकान के साथ मनमानी होती रही लेकिन किसी भी कार्यकारिणी किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। कोई न कोई कारण तो जरूर रहा होगा। मेरे ख्याल से थोड़ा चिंतन करेंगे तो कारण आपको समझ में आ जाएगा। कार्यकारिणी से मुझे यह भी जानकारी मिली कि चिरंजीलाल छाबड़ा की मृत्यु के उपरांत इस दुकान का भाड़ा किसी के भी द्वारा मंदिर को नहीं दिया गया। यानी वर्ष 2019 से इस दुकान का भाड़ा मंदिर को नहीं मिल रहा था। इस विषय पर मंत्री कमल विनायक्या परिवार के सभी सदस्यों से मिले लेकिन सब ने हाथ झाड़ दिया जबकि छाबड़ा परिवार का राजकुमार छाबड़ा हर
माह जैन स्टोर से 18000 भाड़ा वसूल रहा था। पवन छाबड़ा की मां और उनकी पत्नी ने मेरे सामने स्पष्ट कहा था कि इस दुकान से उनका कोई लेना देना नहीं है यह दुकान जैन पंचायत अपने अधीन ले ले और पंचायत जिसे देना चाहे दे दे। कार्यकारिणी की बैठक में मुझे यह भी जानकारी मिली कि राजकुमार जैन ने अवैध रूप से जैन स्टोर से पिछले 10 वर्षों में 1200000 रुपए का भाड़ा वसूला है जिसमें से एक भी रुपया मंदिर को नहीं मिला है। कार्यकारिणी की बैठक को में चर्चा के दौरान कार्यकारिणी के ज्यादातर सदस्य चाहते थे कि यह दुकान विधिवत रूप से राजकुमार छाबड़ा को 2850 रुपए के किराए पर दे दी जाए और उनसे पुराना 2 साल का बकाया किराया वसूला जाए और करीब 12 लाख रुपया जो उन्होंने अवैध रूप से किराए के रूप से वर्तमान कब्जे दार से प्राप्त किया है
उसे किसी छोटी मोटी राशि प्राप्त कर निपटा दिया जाए। इस पर भी मुझे कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि मैं इस विषय पर पहले कभी पड़ा नहीं था। इस चर्चा के दौरान यह जानकारी भी मिली कि जैन स्टोर राजकुमार जैन को 18000 प्रति माह दे रहा है। कार्यकारिणी में यह भी चर्चा हुई कि राजकुमार छाबड़ा ने अवैध रूप से इस दुकान को भाड़ा पर लगाया है इसीलिए यदि आवश्यकता पड़ी तो कार्यकारिणी के लोग अपने बाहुबल से इस दुकान को खाली करवाएंगे। जैसे ही बाहुबल से दुकान को खाली कराने की जानकारी जैन स्टोर को मिली वैसे ही जैन स्टोर ने हमारे पंचायत के अध्यक्ष और मंत्री को 27 जनवरी को कानूनी नोटिस दिया। इस नोटिस में कहा गया कि वह पिछले 10 साल से इस दुकान का भाड़ा के रकम का भुगतान राजकुमार जैन को करते चले आ रहे हैं। अभी-अभी उन्हें पता चला है कि यह दुकान राजकुमार जैन छाबड़ा की नहीं है और राजकुमार जैन उन से पैसा लेकर 18000 प्रति माह पंचायत को नहीं दे रहे हैं और पंचायत उन्हें दुकान से निकालना चाहता है।

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