अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

‘पहले पंचायतों में शराब की दुकानें खोलकर लोगों को नशे की लत डाली गई, अब किया जा रहा परेशान’


पटना:- बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत चरम पर है. विपक्ष के साथ ही बीजेपी भी इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ रही है. आरजेडी के प्रधान महासचिव सह विधायक आलोक मेहता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंद कमरे में समीक्षा करने से कुछ नहीं होगा.
आलोक मेहता ने शराबबंदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर एनडीए में से किसी को शराबबंदी कानून पर एतराज है तो फौरन संज्ञान लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. शराबबंदी पूरी तरह से फेल है.
आलोक मेहता ने साफ-साफ कहा कि शराबबंदी को लेकर जो बात सभी जगहों से आ रही है, निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री को इस कानून की समीक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के बाद सिर्फ और सिर्फ गरीबों को दिक्कत हो रही है. बड़े पैमाने पर बिहार में शराब लाया जा रहा है. लेकिन शराब तस्कर पकड़े नहीं जा रहे हैं. जो लोग शराब पी रहे हैं सिर्फ उन्हें पकड़ा जा रहा है.
दरअसल बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर लगातार बयानबाजी हो रही है. सभी दल अपने-अपने तरह से शराबबंदी कानून को लेकर बयान दे रहे हैं. वहीं बीजेपी विधायक ने ही सरकार पर निशाना साधा है. बीजेपी विधायक हरि भूषण ठाकुर बचौल ने साफ-साफ शब्दों में कहा था कि शराबबंदी कानून की वापसी होनी चाहिए.
बता दें कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने महिलाओं से शराबबंदी का वादा किया था. इसका एक उद्देश्य घरेलू हिंसा को रोकना था. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपना वादा निभाया. एक अप्रैल 2016 बिहार निषेध एवं आबकारी अधिनियम के तहत बिहार में शराबबंदी लागू कर दी गई. तब से सरकार के दावे के बावजूद शराब की तस्करी और बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. इसका प्रमाण शराब की बरामदगी और इस धंधे से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी है.

%d bloggers like this: