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चतरा के ऐतिहासिक काली मंदिर की आस्था में बरबस खींचे चले आते हैं श्रद्धालु


चतरा:- मां दुर्गा की आराधन को लेकर पूरे जिले में उत्सव का माहौल है। शहर के कई हिस्सों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। भव्य पंडाल बनाये गए है। चतरा शहर के अवल्ल मुहल्ला स्थित ऐतिहासिक काली मंदिर में भी माता की पूजा को लेकर रोज भारी भीड़ उमड़ रही है। चतरा के एकमात्र काली मंदिर का इतिहास एक सौ साल पुराना है। दुर्गा पूजा में नवमी के दिन यहां पारम्परिक वेशभूषा धोती-कुर्ता में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना निश्चित तौर से पूरी होती है।
मंदिर के प्रधान पुजारी गोविंद मिश्रा बताते हैं कि काली मंदिर की महिमा अपरंपार है। इनके पिता पंडित ज्ञानदत्तजी मिश्रा की अगुवाई में एक सौ वर्ष पूर्व मंदिर की स्थापना की गई थी। श्री मिश्र बताते है कि एक सौ वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में प्लेग बीमारी फैली थी,जिसमे सैंकड़ो की संख्या में लोग काल की गाल में समा गए थे। बीमारी से मुक्ति के लिए उनके पिताजी ने लोगो को काली मंदिर की स्थापना के लिए प्रेरित किया।
पुजारी कहते हैं कि जिस स्थान पर वर्तमान समय मे मंदिर अवस्थित है, वहां पहले झोपड़ीनुमा स्थान था। झोंपड़ी में ही माता काली को स्थापित किया गया था। लोगों की आस्था के साथ धीरे-धीरे इस झोपड़े ने आकर्षक मंदिर का रूप ले लिया। जो आज भी भक्तो के लिये आस्था का केंद्र बिंदु बनकर लोगों का कल्याण कर रहा है।
गोविंद मिश्रा बताते हैं कि खासकर नवरात्र के मौके पर महाआरती के दौरान जो भक्त पूजा में शामिल होते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही वजह है कि लोग झारखंड ही नहीं अपितु बिहार, बंगाल व यूपी से भी श्रद्धालुगण यहां अवश्य पहुंचते हैं।
बहरहाल चतरा के इस ऐतिहासिक काली मंदिर में वैसे तो श्रद्धालुओं का तांता सालों भर देखने को मिलता है। किंतु नवरात्र के मौके पर यहां की छटा एक अलग ही आस्था बिखेरती है, जहां लोगों की मुरादे अवश्य पूरी होती है।

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