January 18, 2021

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सभी शहरों में विकसित करें स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम, जलजमाव से मिलेगी मुक्ति : मुख्यमंत्री नीतीश

पटना:- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों को जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए अधिकारियों को सभी शहरों में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्ट विकसित करने का आज निर्देश दिया।
श्री कुमार ने गुरुवार को यहां एक, अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत नगर विकास एवं आवास विभाग से कार्यान्वित होने वाली योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में निर्देश देते हुए कहा कि राज्य के सभी शहरों में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को विकसित करें। इससे शहरों में जलजमाव की समस्या पैदा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि शहरों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की समुचित व्यवस्था हो, जिससे शहर विकसित एवं साफ-सुथरा रहे।

मुख्यमंत्री ने कचरों का सदुपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने की हिदायत देते हुए कहा कि राज्य में भी कचरा के सदुपयोग के लिए कुछ जगहों पर जीविका दीदियों द्वारा मॉडल रूप में काम किया जा रहा है। इसके अलावा देश के अन्य स्थानों पर भी हो रहे ऐसे बेहतर मॉडलों का अध्ययन कर इस संबंध में यहां भी काम करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलित रहेगा तो लोगों का जीवन भी बेहतर होगा।
श्री कुमार ने कहा कि शहरों में रह रहे बेघर गरीब भूमिहीनों के आवासन के उद्देश्य से बहुमंजिला भवन निर्माण के लिए कार्ययोजना बनाकर तेजी से काम करें। उन्होंने कहा कि वृद्ध अमीर हों या गरीब जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है उनके लिए सभी शहरों में वृद्ध आश्रय स्थल का निर्माण तेजी से कराया जाए। इन वृद्ध आश्रय स्थलों पर भोजन, चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ-साथ अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए समुचित व्यवस्था हो। आश्रय स्थलों के बेहतर प्रबंधन एवं संचालन की व्यवस्था विभाग अपने स्तर से करे।
मुख्यमंत्री ने दाह संस्कार के लिए सभी जिलों में स्थलों का सर्वे और शवदाह गृह के निर्माण के लिए तेजी से काम करने का निर्देश देते हुए कहा कि सभी शहरों एवं महत्वपूर्ण नदी घाटों पर बेहतर सुविधाओं के साथ विद्युत शवदाह गृह एवं परंपरागत शवदाह स्थल के निर्माण की व्यवस्था की जाए ताकि दाह संस्कार में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि पटना का बांस घाट सबसे पुराना घाट है। यहां और नए विद्युत शवदाह गृह के निर्माण के साथ-साथ परंपरागत शवदाह स्थल की व्यवस्था की जाए।
श्री कुमार ने कहा कि बांस घाट से गंगा नदी की धारा दूर चली गयी है। परंपराओं को ध्यान में रखते हुए शवदाह गृह के बगल में दो तालाबों का निर्माण कराया जाए, जिसमें गंगा नदी का पानी भरा रहे। एक तालाब में दाह संस्कार से जुड़े कार्य हो सकें तथा दूसरे तालाब में लोग स्नान कर सकें। उन्होंने कहा कि शवदाह स्थल पर आने वाले लोगों के लिए स्नानागार, शौचालय, वस्त्र बदलने के लिए कमरा, पेयजल, कैंटीन की व्यवस्था के साथ ही दाह संस्कार एवं पूजन से जुड़ी सामग्रियों के लिए स्थल निर्धारित किये जाएं।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कुछ स्थानों पर परंपरागत, धार्मिक एवं ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार अंतिम संस्कार की अवधारणा है, ऐसे घाटों को भी विकसित किया जाए । उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे जहां अंतिम संस्कार पहले से होते आ रहे हैं, वहां नदी किनारे ही बगल में तालाब की व्यवस्था की जाए।
श्री कुमार ने कहा कि इन तालाबों में पानी का प्रबंध किया जाए ताकि लोगों को अंतिम संस्कार के कार्य एवं स्नान में सुविधा हो सके और नदी का जल भी स्वच्छ रह सके। उन्होंने कहा कि गांवों में भी एक ऊंची जगह को चिन्हित कर वहां शवदाह गृह के निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करें। शवदाह गृह स्थलों की घेराबंदी के साथ ही वहां पहुंच पथ को बेहतर बनायें।
बैठक में उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री तारकिशोर प्रसाद, मुख्य सचिव दीपक कुमार, समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा एवं अनुपम कुमार, बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के प्रबंध निदेशक रमण कुमार सहित नगर विकास एवं आवास विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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