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अति महत्वाकांक्षी चोरकारी पावर ग्रिड स्टेशन के उद्घाटन के बावजूद जिले वासियों को बमुश्किल मिल पा रही है 8 घंटे बिजली


चतरा:- कहते हैं कि इंसान को जीवन जीने में मूलभूत सुविधाओं की घोर आवश्यकता होती है। मूलभूत सुविधाओं के बगैर जीवन जीना बहुत कठिन हो जाता है। लेकिन इन्हीं मूलभूत सुविधाओं में शुमार बिजली व पानी आज चतरा जिलेवासियों के लिए आफत बन गया है। स्थिति यह है कि जिलेवासियों को बमुश्किल महज सात से आठ घंटे ही बिजली मयस्सर हो रही है। ऐसे में शहरवासियों के कार्य की गति थम सी गई है। सबसे ज्यादा परेशानी इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय से जुड़े लोगों को उठानी पड़ रही है। बिजली की आंख मिचौनी से जहां इनके समक्ष अभी से ही लॉक डाउन के बाद एक बार फिर भुखमरी की स्थिति उत्पन्न होने लगी है वहीं बच्चों के पठन-पाठन के साथ-साथ दैनिक दिनचर्या पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सबसे भयावह स्थिति बिजली की अनियमितता के कारण शहरी जलापूर्ति योजना की हो गई है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण विगत एक सप्ताह से शहरी जलापूर्ति योजना भी पूरी तरह से ठप पड़ गया है। ऐसे में बिजली विभाग के अधिकारियों के प्रति शहर वासियों में आक्रोश धीरे-धीरे पनपने लगा है। शहरवासी अविलंब व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी देने लगे हैं। गौरतलब है कि जिले में निर्बाध बिजली आपूर्ति को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो माह पूर्व ही चतरा की अति महत्वाकांक्षी चोरकारी पावर ग्रिड का उदघाटन किया था। जिसके बाद लोगों के दिलों में यह उम्मीद की किरण जागी थी कि अब उन्हें बिजली की आंखमिचौली से छुटकारा मिल जाएगा। लेकिन चंद दिनों तक स्थिति ठीक होने के बाद परिस्थितियां फिर से बदल गई हैं। अब पूर्व से भी खराब स्थिति जिले में बिजली की हो चुकी है। विभागीय कर्मियों की मानें तो पावर ग्रिड में ही आएदिन आ रहे फॉल्ट व लोड की समस्याओं के कारण जिले में बिजली के संकट उत्पन्न हुई है। अब लोगों को इस झंझट से छुटकारा कब मिलता है यह बताने से विद्युत कर्मी भी असमर्थता जता रहे हैं।

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