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त्रिपुरा में हर बूथ पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात करेंः सुप्रीम कोर्ट


नयी दिल्ली:- उच्चतम न्यायालय ने त्रिपुरा नगर पालिका चुनाव में सभी मतदान और मतगणना केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती का गुरुवार को आदेश दिया।
राज्य में आज स्थानीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं। इसके लिए के लिए 770 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वोटों की गिनती 28 नवंबर की जाएगी। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने राज्य में कानून व्यवस्था की लचर स्थिति का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वे भयमुक्त एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए पर्याप्त केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करने के तत्काल प्रभाव से उपाय करें। शीर्ष अदालत ने त्रिपुरा सरकार से कहा कहा कि तत्काल आकलन कर केंद्रीय गृह मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि समुचित सुरक्षा इंतजाम किया जा सके। पीठ ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह आज चल रहे चुनाव के लिए बिना किसी देरी के अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षाबल मुहैया करायें। केंद्र सरकार की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आश्वस्त किया कि पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल उपलब्ध कराए जाएंगे। शीर्ष अदालत ने सभी 770 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश दिया है। साथ ही, मतदान तथा मतगणना अधिकारियों एवं चुनाव से संबंधित अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा की तत्काल मांग कर सकते हैं।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से उच्चतम न्यायालय को बताया गया की मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी की व्यवस्था नहीं है। इस पर पीठ ने इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया को निर्बाध रूप से रिपोर्टिंग की अनुमति देने का आदेश दिया।
शीर्ष अदालत ने तृणमूल कांग्रेस की चुनाव स्थगित करने की गुहार को 23 नवंबर को ठुकरा दिया था। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने और राज्य में हिंसा का आरोप लगाया था। उनकी याचिका पर अदालत ने राज्य सरकार को कानून व्यवस्था के समुचित इंतजाम करने का निर्देश दिया था। इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने 22 नवंबर को अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सरकार अदालती आदेशों का पालन नहीं कर रही है। राज्य की प्रमुख विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी राज्य कानून व्यवस्था की खराब स्थिति का हवाला देते उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

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