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पृथक मिथिला राज्य के गठन समेत अन्य मांगों के समर्थन में संसद के समक्ष होगा प्रदर्शन : डॉ. बैद्यनाथ

दरभंगा:- मिथिलांचल के विकास के लिए समर्पित विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने शुक्रवार को कहा कि मिथिला के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, शैक्षणिक, साहित्यिक और भाषा के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य का गठन बेहद जरूरी है।
श्री चौधरी ने शुक्रवार को यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि सांस्कृतिक संपन्नता के लिए दुनिया भर में विख्यात मिथिला आज सरकारी अपेक्षाओं के कारण लगातार आर्थिक पिछड़ेपन का शिकार होने को मजबूर हो रहा है। परिणाम यह है कि जिस क्षेत्र के गांव-गांव में कभी शिक्षा का केंद्र हुआ करता था, आज वहां के छात्र पलायन को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पृथक मिथिला राज्य के गठन सहित अन्य मांगों के समर्थन में 19 जुलाई को अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में संसदीय सत्र के दौरान संसद भवन पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ प्रदर्शन किया जायेगा। महासचिव ने कहा कि बाढ़ की जिस विभीषिका को हमारे पुरखों ने देखा। आज हमलोग भी इससे तबाह हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ी भी इससे अछूती नहीं रहेगी। यह निर्विवाद सत्य जान पड़ता है। क्योंकि बाढ़ के निदान का भरोसा देकर अबतक सिर्फ और सिर्फ मिथिला को ठगा जाता रहा है। डॉ. चौधरी ने बताया कि संसद भवन पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मिथिला के लोगों का जत्था डॉ. महेन्द्र नारायण राम, डॉ. बुचरू पासवान, प्रो जीवकांत मिश्र, डॉ. अशोक सिंह आदि के नेतृत्व में 18 जुलाई की सुबह बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा। जबकि दिल्ली में आन्दोलन की कमान समिति के संयोजक प्रो अमरेन्द्र कुमार चौधरी एवं ई शिशिर कुमार झा आदि संभालेंगे। संस्थान के महासचिव ने कहा कि जब इस क्षेत्र पर बाढ़ का कहर नहीं होता तो उस समय इस क्षेत्र पर सूखे का प्रहार होता है। बावजूद इसके मिथिलांचल सूखा और बाढ़ के कोढ़ का निरंतर शिकार होता आ रहा है और इसके आंसू पोछने वाला भी कोई नहीं है। चीनी मिल, पेपर मिल, जूट मिल आदि कई बड़े औद्योगिक इकाई यहां कबार का ढेर मात्र बने हुए हैं जिस कारण मिथिला की प्रतिभा रोटी के लिए विभिन्न प्रदेशों में मजदूरी करने को विवश है। उन्होंने कहा कि भाषा-साहित्य का विकास संरक्षण के अभाव में प्रभावित हो रहा है। मैथिली के प्रति सरकारी स्तर पर षड्यंत्र चल रहा है। मिथिला के विकास के नाम पर ऐसी ओछी राजनीति की जा रही है। जैसे सरकार की नजर में मिथिला क्षेत्र उसका अंग ही नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित बिहार की एकमात्र भाषा मैथिली की प्रगति में सोची-समझी राजनीति के तहत बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। डॉ. बैद्यनाथ ने कहा कि संसद के समक्ष धरना-प्रदर्शन के दौरान मिथिला क्षेत्र अंतर्गत ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लगभग 500 किलोमीटर क्षेत्र में एग्रीकल्चर कॉरिडोर बेस्ड विकास के तहत नेशनल एग्रीकॉरिडोर की स्थापना करते हुए विभिन्न एग्रीकल्सटर के प्रोत्साहन के लिए एग्रोबेस्ड आईटी एवं बायोटेक्निकल एजुकेशनल हब बनाने सहित मिथिला मखान के उत्पादन एवं निर्यात के लिए केंद्र के कृषि मंत्रालय के अधीनस्थ नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड एवं वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी में सूचीबद्ध करते हुए इसे प्राथमिकता देने के लिए सरकार से अनुरोध किया जाएगा। महासचिव ने कहा कि अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति इन सभी समस्याओं के एकमात्र निदान के लिए पृथक मिथिला राज्य के पुनर्गठन को अवश्यंभावी मानती है। समिति इसके लिए संघर्षशील है और मिथिला की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक और भाषाई क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मिथिला के सड़कों से लेकर संसद तक आंदोलन चलाती आ रही है और पृथक मिथिला राज्य के गठन तक यह अभियान अनवरत चलता रहेगा। 19 जुलाई के कार्यक्रम में मिथिला के विभिन्न हिस्से के लोगों सहित प्रवासी मैथिल भी भाग लेंगे ।

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