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फादर स्टेन स्वामी की मौत की न्यायिक जांच की मांग को लेकर राजभवन के समक्ष प्रदर्शन

रांची:- राजधानी रांची के शहीद चौक ,जिला स्कूल मैदान से सीपीआई एम की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव , पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता के नेतृत्व में पुलिसवालों के बंदिशों के बीच आज राजभवन के समक्ष प्रदर्शन किया। जुलुस , प्रदर्शन के बाद सभा तब्दील हो गई ,सभा की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता दयामणि बरला ने की ,भुवनेश्वर केवट ने संचालन किया। सभा को संबोधित करते हुए महिला नेत्री वृंदा करात ने कहा केंद्र की,सरकार विरोधियों की आवाज को दबाने के लिए एक साजिश के तहत फादर स्टैन स्वामी के फर्जी मुकदमों में फंसा कर जेल भेजा, जहां पर उनकी बगैर इलाज के मौत हो गई। साजिश का पर्दाफाश करने के लिए देश के तमाम जनवादी संगठनों, सामाजिक संगठनों ,राजनीतिक दलों ,पत्रकारों बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है। उन्होंने अपील किया फादर स्टैन स्वामी के मामलों को न्यायिक जांच नहीं केंद्र सरकार कराती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा ।
हजारीबाग के पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि केंद्र की सरकार जब से सत्ता में आई है, तब से लगातार सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है। जिस तरह से फादर स्टैन स्वामी झारखंड की जल जंगल जमीन की लड़ाई लड़ रहे थे , देश के कारपोरेट घराने के लोग राज्य के खनिज संपदाओं के ऊपर कब्जा जमाने के लिए कई हथकंडे अपना रही है । फादर स्वामी के मौत ,जल जंगल जमीन की आवाज उठाने वाले को दबाव बनाने के लिए साजिश है ।उन्होंने अपील किया कि ,राज्य के प्रत्येक जिलों के गांव गांव में आवाज को बुलंद करने की जरूरत है ।
भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ने कहा कि हर हाल में केंद्र की सरकार को फादर स्टेन स्वामी के मामले को न्यायिक जांच कराएं और मामले को उद्भेदन करें ,जो आदमी ना सही से बोल सकता है ,न चल सकता है, न सुन सकता है ,वैसे आदमी को 84 वर्षीय वृद्ध को जानबूझकर केंद्र की सरकार मौत के घाट उतारा है। इसलिए स्वामी की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी झारखंड राज्य के सहायक सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि केंद्र की सरकार जब से सत्ता में आई है तब से लगातार विरोधियों की आवाज दबाने के लिए अपने कार्यकारी एजेंसियों के इस्तेमाल कर रही है। सवाल केवल फादर स्टैन स्वामी कि नहीं ,पहले भी देश के जाने माने राजनेताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कर विरोधियों की आवाज को दबाने की साजिश की गई, लेकिन जन उबाल के कारण उन्हें वापस लेना पड़ा। देश में कारपोरेट घराने के इशारे पर केंद्र की सरकार काम कर रही है। जब उनके जनविरोधी नीतियों को, विरोध करने वाले को फसा रही है। इसलिए आने वाले दिन में अघोषित आपातकाल के विरुद्ध और भी आंदोलन को तेज करना पड़ेगा । सभा को भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, शुभेंदु सेन, मासस के मिथिलेश सिंह ,सुशांतो मुखर्जी, एस एस यू आई के मिटु पासवान ,सुमित राय ,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव अजय कुमार सिंह, माकपा के जिला सचिव सुखनाथ लोहरा, भाकपा माले के जिला सचिव भुवनेश्वर केवट, माकपा के राज्य सचिव मंडल के सदस्य प्रकाश विप्लव, वरुण कुमार, राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ,महिला नेत्री दयामणि बरला, भाकपा के फर्जाना फारुकी, प्रफुल्ल लिंडा ,वीरेंद्र कुमार, नदीम खान, मेहुल मृगेंद्र, नौरीन अख्तर, सीटू के एसके राय, अलोका कुजूर ,सच्चिदानंद मिश्रा, रातू प्रखंड के प्रमुख सुरेश मुंडा, माकपा नेता भवन सिंह ,सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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