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एचईसी की समस्या को लेकर एक शिष्टमंडल ने रामेश्वर उरांव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा

रांची:- एचईसी के विभिन्न प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों का एक शिष्टमंडल एचईसी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सह वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव से अपराह्न 12ः30 बजे कांग्रेस भवन, रांची में मिलाकर एचईसी को बचाने के लिए परमाणु उर्जा विभाग के अधीन करने या राज्य सरकार अपने अधीन लेकर चलाने संबंधी एक ज्ञापन सौंपा। वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि आज कैबिनेट के बैठक के उपरांत चर्चा कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। इस मौके पर झारख्ांड प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के को-ऑर्डिनेटर सतीश पॉल मुंजनी उपस्थित थे।
ज्ञापन में कहा गया है कि एचईसी देश ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा एवं प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग उद्योग है, जिसे दुनिया में इससे मातृ उ़द्योग (मदर उद्योग) के नाम से जाना जाता है। ज्ञातव्य है कि इसका उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1958 में किया था। प्रारंभ में करीब 22 हजार स्थायी मजदूर कार्यरत थे। आज मात्र 2500-3000 मजदूर कार्यरत है, लेकिन जो उत्पादन क्षमता प्रारंभ काल में था आज भी इतनी पुरानी मशीन होने के बावजूद भी इतने कम मजदूर में वहीं उत्पादन क्षमता बरकरार है। मजदूरों का वेतन पुर्नरीक्षण कार्य वर्ष 1917 से लंबित है, इनके कई प्रकार के सुविधाओं में कटौती की गई है। चार माह का वेतन भी बकाया है फिर भी मजदूर शांतिपूर्ण ढंग से उत्पादन का काम कर रहे हैं। एचईसी के पास करोड़ों का कार्यादेश है पर कार्यशील पूंजी के अभाव में वह कार्य नहीं हो पा रहा है। यह एक मात्र ऐसा उद्योग है जहां क्रेन बनता है, जिसकी शानीध दुनिया में कही नहीं है। इसके अतिरिक्त डिफेन्स, इसरो, डीआरडीओ, बोकारो स्टील, राउरकेला, भिलाई आदि प्रतिष्ठानों में आवश्यक चीजें बनाकर उपलब्ध कराता है।
2016 में डॉ बीके सारस्वत सदस्य नीति आयोग के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन की गई थी जिसें उन्हें आधुनिकीकरण करने की सिफारिश की थी, देश के मिसाइल मैन, पूर्व राष्ट्रपति डॉ, एपीजे अब्दुल कलाम आजाद ने इसे प्रभावित होकर आधुनिक कारखानों के मंदिर के रूप में नाम से अभिभूत किया था। एचईसी को चलाने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग ने भी अपने अधीन लेने का प्रस्ताव भारी उद्योग विभाग को दिया है। इसके उपरांत इस विषय को परमाणु ऊर्जा कमीशन के बैठक में निर्णय लिया गया है कि एचईसी भारत वर्ष के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया। पर खेद का विषय है नीति आयोग की दूसरी टीम की 05 अप्रैल 2021 के संपन्न बैठक में एचईसी को बंद करने की सिफारिश कर केन्द्र सरकार के वित्त विभाग के अंदर कार्यरत डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड एसेस्ट मैनेजमेंट को भेजा है।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि जिस एचईसी के लिए 8500 एकड़ जमीन स्थानीय लोगों ने यह सोच कर दिया था कि कारखाना से सिर्फ स्थानीय लोगों को ही नही बल्की पूरे राज्य और देश के लोगों को रोजगार मिलेगा। झारखंड में आर्थिक समृद्धि आयेगी। किन्तु दुर्भाग्यवश भाजपानीत केन्द्र की सरकार एचईसी को पूंजीपतियो के हाथ बेचने पर अमादा है।
प्रतिनिधि मंडल में हटिया कामगार यूनियन के (एटक) के अध्यक्ष केपी साहु, एचईसी श्रमिक कर्मचारी यूनियन के प्रकाश कुमार, हटिया मजदूर लोकमंच के लोकनाथ नायक, विमल महली, राजकुमार शाही के अलावा प्रदेश कांग्रेस के जगदीश साहू, प्रभात कुमार आदि शामिल थे।

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