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बच्चों के बचपन को बचाने की कोशिश में जीवन समर्पित

25वर्षों से खिलौना बनाने तथा अन्य लोगों को यह गुर सिखाने में जुटी विभा कुमारी

रांची:- वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमणकाल में पिछले डेढ़ वर्षां से झारखंड समेत देशभर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे लॉकडाउन और अनलॉक की प्रक्रिया के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी व्यापक असर पड़ा है। संक्रमण के खतरे के मद्देनजर अभिभावक एहतियातन अपने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं, जिसके कारण बच्चे अब ज्यादातर समय स्मार्ट फोन और टीवी के साथ गुजार रहे हैं। ऐसे में खिलौने बच्चों के बचपन को बचाये रखने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। रांची की विभा कुमारी इस दिशा में पिछले 25वर्षां से प्रयासरत है और उनका ज्यादातर समय खिलौना बनाने तथा अन्य लोगों को यह गुर सिखाने में व्यतीत होता है। उन्होंने अपने जीवन के एक बड़े हिस्से को बच्चों के बचपन को बचाने में समर्पित कर दिया है।
रांची की रहने वाली विभा कुमारी बहुत ही कम लागत में वे प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक और कांच के बोतल के अलावा कागज और कपड़ों से खिलौना बनाती हैं। खिलौना सेक्टर से जुड़ी केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों से विभा कुमारी उत्साहित नजर आती हैं। वह कहती हैं की खिलौना सेक्टर को बढ़ावा मिलने से स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
विभा कुमारी से प्रशिक्षण ले रही एक युवती लाली खिलौना सेक्टर में रोजगार की संभावनाओं को तलाश रही हैं। वह कहती हैं कि बच्चों के लिए वे अब खिलौना बाहर से नहीं खरीदती हैं और जल्द ही प्रशिक्षण पूरा कर खिलौना बनाने में महारत हासिल कर लेंगी और उसे बेचकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करेंगी।
खिलौनों के वैश्विक बाजार में भारत की भागीदारी बढ़ाने को लेकर कई प्रयास किये जा रहे हैं। स्थानीय कारीगर भी इन प्रयासों का हिस्सा बन रहे हैं। अगर इन्हें सही मार्गदर्शन और आर्थिक मदद मिले तो वे काफी हद तक आगे बढ़ सकते हैं।

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