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सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का मेगा सेल किए जाने का फैसला आत्मघाती होगा – सीटू


रांची:- मोदी सरकार और उसका नीति आयोग जिस तरीके से महामारी की आपदा को अवसर के रूप मे इस्तेमाल करते हुए हमारी बहुमूल्य राष्ट्रीय संपदा का मेगा सेल लगा रही है यदि केंद्र सरकार के इस राष्ट्र विरोधी कदम का सशक्त विरोध नहीं किया गया तो हमारी आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्म सम्मान गुलामी के अंधेरे दौर मे चला जायेगा.
यह निष्कर्ष आज सीटू, झारखंड के पदाधिकारियों की रांची में संपन्न हुयी बैठक मे आया. इसी निष्कर्ष के आलोक मे सीटू ने सार्वजनिक उधमों के मेगा सेल के फैसले के खिलाफ स्वतंत्र और संयुक्त रूप से एक बड़ा अभियान चलाये जाने का निर्णय लिया है इस अभियान के पहले चरण मे अगले दो माह तक सार्वजनिक क्षेत्र के 5 लाख कामगारों से सीधे संपर्क किया जायेगा. अभियान के दुसरे दौर मे राज्य के पांच औद्योगिक क्षेत्रों मे श्रमिकों और नागरिकों का संयुक्त कंवेशन किया जायेगा. अभियान के अंतिम चरण मे धरना, जूलुस, प्रदर्शन के कार्यक्रम के बाद जेल भरो अभियान संगठित किया जायेगा.
सीटू ने हेमंत सरकार द्वारा अपने वादे से हटकर ट्रेड युनियनों से बिना चर्चा किए केंद्र सरकार द्वारा लागू की गयी मालिक पक्षीय श्रम संहिताओं की राज्य नियमावली बनाए जाने की हड़बड़ी पर चिंता व्यक्त की है .इस सबंध मे श्रमिक संगठनों का एक संयुक्त शिष्टमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराएगा. सीटू ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 25 सितंबर के भारत बंद के आह्वान का समर्थन करते हुए अपनी तमाम युनियनों से बंद के समर्थन मे उतरने का एलान किया है. आज की बैठक की अध्यक्षता मिथिलेश सिंह ने की. बैठक मे डी. डी. रामानंदन के. के. त्रिपाठी, मो. इकबाल, प्रकाश विप्लव, आर. पी. सिंह, अनिर्वान बोस, विश्वजीत देब, मानस चटर्जी, विजय कुमार भोय, भारत भुषण, बलभद्र दास, धनेश्वर तुरी, बसंत कुमार और असीम हलदार समेत परिवहन, निर्माण,इस्पात, कोयला, पत्थर, बीडी, ऊर्जा, तांबा, बाक्साइट, माइका और असंगठित सेक्टर की युनियनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया.

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