April 17, 2021

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नुलबिल मेले में देवी को नमक चढ़ाकर मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना के लिए उमड़ रही भीड़

दुमका:- झारखंड में अद्भुत मेलों की वर्षों पुरानी परंपराएं हैं। ऐसे ही अद्भुत मेले इन दिनों दुमका जिले में चल रहे हैं, जहां देवी को प्रसाद के रूप में नमक चढ़ाने की प्रथा है। यहां दूर-दूर से लोग आते हैं और देवी को नमक चढ़ा कर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
दुमका में नदियों के किनारे जाड़े के मौसम में मकर संक्रांति के बाद शुरू होने वाले कई मेले में नुनबिल और तातलोई मेले की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। गर्म जलकुंड के निकट लगने वाले इस मामले में दूर-दूर से लोग आते है। नुनबिल मेले में आने वाले लोग गर्म जलकुंड में नहाने के बाद देवी को नमक चढ़ा रहे हैं।
मान्यता है कि इस गर्मजल कुंड में स्नान कर देवी को नमक चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और चर्म रोग से मुक्ति मिलती हैं। इन मेलों, प्रथाओं और मान्यताओें की चर्चा 1910 के संताल परगना गजेटियर में भी है, जिसके मुताबिक तब नुनबिल जैसे मेलों में बासुकिनाथ श्रावणी मेले से भी अधिक भीड़ होती थी। नुनबिल‌ में पुजारी पहाड़िया आदिम जनजाति समुदाय का परिवार है, जबकि तातलोई में पुजारी खेतौरी जाति के हैं।
बहरहाल, इन मेलों और नमक की देवी को प्रसाद के रूप में नमक चढ़ाने की प्रथा को लेकर लोक अवधारणा जो भी हो, इनका वैज्ञानिक पक्ष यही है कि सैंकड़ों साल पहले यहां की आदिम जनजाति में फैले घेघा और चर्म रोग से मुक्ति के लिए ही गर्मजल से नहाने औेर नमक का सेवन‌ करने की जागरूकता के प्रसार के लिए इन मेलों की शुरुआत हुई होगी, जिनमें दूसरी जाति और समुदाय के लोग भी शामिल होकर सांस्कृतिक संकुल की रचना करते हैं।

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