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माकपा ने वृंदा कारात पर भाजपा नेताओं के अशोभनीय टिप्पणी की निंदा की

रांची:- माकपा का झारखण्ड राज्य सचिवमंडल भाजपा के उस गैर जिम्मेदाराना बयान की कड़ी निंदा करता है जिसमें पार्टी की पालिट ब्यूरो सदस्य बृंदा कारात द्वारा एनआइए पर दिए गए उस वक्तव्य पर अशोभनीय टिप्पणी की है जिसमें उन्होंने इस एजेंसी पर गैर कानूनी तरीके से काम करने की बात कही थी. भाजपा का यह जाना पहचाना हथकंडा है जो इनकी करतूतों की सच्चाई सामने आने पर इनके द्वारा अपनाया जाता है.
पार्टी की ओर से कहा गया है कि एक लोकतांत्रिक देश मे वंचितों के अधिकार के पक्ष मे बोलने वाले नागरिकों को राजद्रोह के झूठे आरोप मे जेल भेज कर उनकी संस्थागत हत्या के षडयंत्र मे शामिल भाजपा देश की सुरक्षा एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने मे कर रही है. भाजपा के इस अलोकतांत्रिक और तानाशाही पूर्ण हरकतों को देश की जनता समझ चुकी है. इसलिए ही उनके पार्टी प्रवक्ता बौखला कर विपक्ष विशेष कर वाम शक्तियों पर “पाकिस्तान की भाषा“ बोलने का आरोप लगा रहे हैं.
84 वर्षीय वृद्ध और बीमार फादर स्टेन स्वामी की हिरासत मे हुयी मौत ने भाजपा और उसकी नोडल एजेंसी एनआइए को कठधरे मे खड़ा कर दिया है क्योंकि इस मौत पर आम लोगों मे भारी आक्रोश है. हाल ही में देश के दश राजनीतिक दलों ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हिरासत मे हुयी इस मौत पर अपना स्पष्ट विरोध दर्ज कराया है. विरोध करने वालों मे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हैं. उस समय भी भाजपा बौखला कर एक निर्वाचित मुख्यमंत्री का सबंध तथाकथित माओवादियों के साथ जोड़ने लगी जो इनकी हताशा का परिचायक है.
पार्टी के राज्य कमेटी के सदस्य प्रकाश विप्लव ने कहा कि माकपा की स्पष्ट समझ है कि सुरक्षा एजेंसी एनआइए सीधे गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन मे काम करती है. पिछले दिनों लोकतंत्र समर्थकों और संविधान की रक्षा करने की बात करने वाले विश्वविद्यालयों के छात्रों, लेखकों और सामाजिक – राजनीतिक कार्यकताओं को देशद्रोही बताकर गिरफ्तार किए जाने की कार्रवाई गृहमंत्री के इशारे पर ही की गयी है. साथ ही यह शर्मनाक कार्रवाई
बिना उचित जांच-पड़ताल और विरोध के स्वर को दबाने के लिए की गयी है. इस प्रकार की टिप्पणी जेलों मे बंद आरोपियों को जमानत देते हुए विभिन्न उच्च न्यायालयों ने भी की है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने भी गुलामी के समय से चले आ रहे राजद्रोह से संबंधित काला कानून 124 ए के जारी रखे जाने पर भी सवाल उठाए हैं. लेकिन भाजपा जिसकी स्वतंत्रता आंदोलन मे कोई भूमिका नही थी इस गुलामी के दौर वाले काले कानून का इस्तेमाल अपने विरोधियों से निपटने के लिए कर रही है और इस काम मे जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.
माकपा को भाजपा से देशभक्ति का प्रमाण लिए जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि इतिहास के पन्नों मे और देश के नागरिकों के जेहन मे माकपा की भूमिका दर्ज है और पार्टी का रिकार्ड हमेशा आम लोगों के अधिकारों के पक्ष मे मजबूती सी खड़े रहने का है तथा इसे दोहराने की जरूरत नहीं है.

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