अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

बोर्ड-निगम के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के अंदरखाने छिड़ा घमासान

रांची:- झारखंड में कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी होने के साथ ही 20 सूत्री और बोर्ड-निगम के गठन की चर्चा जोरों पर है और इन पदों पर कब्जा जमाने की होड़ में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल के नेता-कार्यकर्त्ताओं की ओर से अपने स्तर से लॉबिंग शुरू कर दी गयी है। लेकिन सबसे ज्यादा होड़ कांग्रेस में मची हुई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी पांच कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी कुछ विधायक इन दिनों अलग-अलग बैठक कर अपनी ताकत का अहसास करा रहे हैं, वहीं कुछ विधायक और नेता दिल्ली दौड़ भी लगाने में जुटे है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायकों को संगठन के आम नेताओं-कार्यकर्त्ताओं की बात सुनने की जिम्मेवारी मिली है, लेकिन इनमें से कई कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक खुद यह कह रहे है कि वे पार्टी के उचित फोरम में अपनी बात रखेंगे, जब प्रदेश कांग्रेस में नेताओं-कार्यकर्त्ताओं की बात सुनने के लिए वे खुद एक प्लेटफॉर्म माने जाते है, ऐसी हालत में उनके द्वारा उचित फोरम की बात करना ही अपने आप में हास्यापद है।
पार्टी की एक विधायक दीपिका पांडेय को हाल ही में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राष्ट्रीय सचिव मनोनीत किया गया और एक राज्य की सह प्रभारी के रूप में जिम्मेवारी भी सौंपी गयी। इस नई जिम्मेवारी मिलने के बाद वह भी रेस हो गयी है। लेकिन जिस राज्य की जिम्मेवारी उन्हें सौंपी गयी है, वहां का दौरा कर संगठन को मजबूत बनाने की बजाय झारखंड में ही पार्टी के कुछ नेताओं से उलझ जा रही है। पिछले दिनों दिल्ली दौरे के क्रम में बात-बात ही रांची महानगर कांग्रेस के अध्यक्ष संजय पांडेय से उनकी तीखी नोक-झोंक हो गयी।
दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर और वरिष्ठ नेता रवींद्र सिंह दिल्ली में बैठे प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह से अपनी निकटकता का धौंस जमाकर संगठन में सिक्का जमाने की कोशिश में लगे है। लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतित्य राजे सिंधिया और जतिन प्रसाद के साथ आरपीएन सिंह की मुलकात और बैठक की खबर इन दिनों दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बनी हुई है। आरपीएन सिंह के कार्यकाल में कांग्रेस के चार-चार पूर्व प्रदेश अध्यक्षों प्रदीप बलमुचू, डॉ0 अजय कुमार, सरफराज अहमद और सुखदेव भगत के पार्टी छोड़ कर चले जाने को भी लोग उनके कमजोर नेतृत्व क्षमता के रूप में आंक रहे है और इन सारे बातों की जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को भी दे दी गयी है।
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ0 अजय कुमार पार्टी में वापसी के बीच एक बार फिर से पद हासिल करने की जुगाड़ में जुट गये है और अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में लॉबिंग में जुटे है। वहीं उनका विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि जब पार्टी नेतृत्व की ओर से एक बार उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी गयी, तो चुनाव के ऐन मौके पर पार्टी छोड़ देने से संगठन को काफी धक्का लगा था, वहीं कर्नाटक से आये एक दूसरे दल के नेता को अब पुनः नेतृत्व सौंपे जाने का भी अंदर ही अंदर व्यापक विरोध हो रहा है।
इस बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार पार्टी की ओर से राष्ट्रव्यापी आउटरीच अभियान की शुरुआत की गयी है। प्रारंभ में इस अभियान की सफलता को लेकर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्षों और जोनल कॉर्डिनेटर को जिम्मेवारी सौंपी गयी थी, लेकिन उनके द्वारा इस अभियान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाये जाने के कारण अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने नियंत्रण कक्ष की स्थापना करे हुए सभी जिलों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की है जो यह दर्शाता है कि संगठन के कार्यों में कार्यकारी अध्यक्ष व जोनल कोर्डिनेटर संगठन के कार्यों को छोड़ दिल्ली दरबार में गोटी सेट करने में लगे हुए हैं।

%d bloggers like this: