अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

शराब ठेके की तरह की सिंडिकेट के हाथों में बालू घाटों को देने की साजिश-बाबूलाल मरांडी


रांची:- भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर माइनिंग डेवलपर सह ऑपरेटर की नियुक्ति प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की हैं। बाबूलाल मरांडी ने बताया कि राज्य में लघु खनिज बालू घाटों-कलस्टरों की बंदोबस्ती एवं संचालन के लिए झारखंड राज्य खनिज विकास निगम द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश एवं वन पर्यावरण विभाग के मापदंड का उल्लंघन करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी है, इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त किया जाए।
बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को कहा कि सरकार द्वारा शराब ठेके के आंवटन में अपनाई गई प्रक्रिया की तरह ही सिंडिकेट के लोगों के हाथों में बालू घाटों को देने की साजिश की जा रही है। झारखण्ड में लगभग 540 बालू घाट है, इन सभी बालू घाटों को राज्य से बाहर के लोगों के हाथों में सौंपने की तैयारी सरकार द्वारा की जा रही है। बालू घाटों की बन्दोबस्ती में जेएसएमडीसी द्वारा प्रकाशित निविदा एनआईटी में भागीदारी के लिए जटिल प्रक्रिया, नियम एवं शर्तें ऐसी बनाई गई है ताकि स्थानीय लोग इस प्रक्रिया में भाग ही नहीं ले सके, जो बिल्कुल ही गलत एवं असंवैधानिक है। इससे सरकार की मंशा साफ झलकती है कि झारखंडियों के साथ आप के नेतृत्व में चल रही सरकार का रवैया कितना हितकारी है।
उन्होंने कहा कि दूसरा महत्वपूर्ण एवं आश्चर्य की बात है कि खान व खनिज विभाग के सचिव एवं जेएसएमडीसी के प्रबन्ध निदेषक के पद पर एक ही पदाधिकारी को पदस्थापित किया गया है। ऐसी स्थिती में जब जेएसएमडीसी द्वारा बरती गई कई अनियमितताओं पर कौन एवं कैसे कार्रवाई हो सकती है, जब एक ही अधिकारी दोनों पदों पर आसीन हो। इस महत्वपूर्ण मामले में झारखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा 11 अक्टूबर 2007 को सरकार को आदेश दिया गया है कि जेएसएमडीसी के प्रबन्ध निदेशक पर स्थायी नियुक्ति होनी चाहिए। लेकिन सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर खान व खनिज के सचिव को ही जेएसएमडीसी के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा कि उक्त पदाधिकारी पूजा सिंघल पर खूंटी में उपायुक्त पद पर रहते हुए करोड़ो रूपये के गबन का आरोप है, इसके समय में सरकारी पैसे का करोड़ों में बदरबाँट हुआ था, इस घोटाले में शामिल एक अभियन्ता को बर्खास्त भी किया जा चुका है। तात्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल पर सरकारी राशि के गबन की जाँच भी अभी लम्बित है। ऐसी परिस्थिती इनके रहते बालू घाटों की बन्दोबस्ती प्रक्रिया नियम सम्मत एवं पारदर्शी तरीके से संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि बालू घाटों की बंदोबस्ती में राज्य में मूलवासियों एवं आदिवासियों के समुचित भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिएु नियम व शर्तों में सरलीकरण करने की जरूरत है अन्यथा यहां के लोग ठगे महसूस करेंगे।

%d bloggers like this: