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विकास सूचकांक में दूसरा स्थान के लिये हिमाचल को बधाई: कोविंद


शिमला:- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वर्ष 2020-21 के लिए नीति आयोग विकास सूचकांक में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर हिमाचल प्रदेश सरकार को बधाई दी है।
श्री कोविंद ने हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व के स्वर्ण जयंती समारोह के उपलक्ष्य में विधानसभा के विशेष सत्र को सम्बोधित करते हुये यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार “सतत विकास लक्ष्य-इंडिया इंडेक्स 2020-21” में हिमाचल प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। हिमाचल प्रदेश कई मापदण्डों पर देश में अग्रणी राज्य है। लोकतंत्र के इस उत्सव पर राज्य के विकास में योगदान देने वाले महानुभावों के साथ 70 लाख निवासियों को बधाई देता हॅूं।
राष्ट्रपति ने कहा “राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की विकास-यात्रा को जन-मानस तक पहुंचाने की पहल अत्यंत सराहनीय है। यह वर्ष हिमाचल प्रदेश तथा पूरे देश के निवासियों के लिए विशेष हर्ष और उल्लास से परिपूर्ण है। इसी वर्ष हम सब स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं और साथ ही हिमाचल प्रदेश राज्य की स्थापना की स्वर्ण जयंती भी मना रहे हैं“।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हिमाचल से गहरा लगाव था। इसे वह अपना घर ही मानते थे। उन्होंने हिमाचल को विशेष औद्योगिक पैकेज प्रदान किया था जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिला। उन्होंने ही 2002 में उस परियोजना की आधारशिला रखी थी जो आज ‘अटल सुरंग’ के नाम से, दुनिया की सबसे लम्बी राजमार्ग-सुरंग के रूप में स्थापित है। इससे हिमाचल और लेह-लद्दाख के हिस्से, देश के अन्य क्षेत्रों से सदैव जुड़े रहेंगे और वहां के लोगों का तेजी से आर्थिक विकास होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि ‘काउंसिल चैंबर भवन’ तथा परिसर, आधुनिक भारत की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं के साक्षी रहे हैं। इसी भवन में श्री विट्ठल भाई पटेल ने सन 1925 में ब्रिटिश प्रत्याशी को हराकर केंद्रीय विधानसभा के अध्यक्ष का चुनाव जीता था। अध्यक्ष के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संसदीय मर्यादा और निष्पक्षता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो आज भी संसद और विधान सभाओं के लिए एक आदर्श है। प्रदेश विधान सभा में श्री जसवंत राम से लेकर श्री ठाकुर सेन नेगी सहित अध्यक्षों एवं प्रभावशाली विधायकों की समृद्ध परम्परा रही है।
श्री काेविंद ने कहा कि वर्ष 2014 में यह विधान सभा देश की पहली पेपरलेस विधान सभा बनी। यह प्रौद्योगिकी के सक्षम उपयोग, पर्यावरण की रक्षा तथा आर्थिक संसाधनों की बचत का अच्छा उदाहरण है। पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने सहित, अनेक सराहनीय प्रयास किए हैं। इस विधान सभा में ऐसे अनेक कानून बनाए गए हैं जिनसे भविष्योन्मुखी परिवर्तन के लिए मार्ग प्रशस्त होता रहा है।

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