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एक नयी सुबह का

आपदा प्रबंधन के लिए कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल प्रयोगशाला शुरू


नयी दिल्ली:- प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने अपने 38वां स्थापना दिवस के अवसर पर स्वदेशी तकनीकी नवाचारों के जरिये ‘आत्मानिर्भर भारत’ के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुये प्रभावशाली आपदा प्रबंधन के लिए कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल लैब की शुरूआत की है। इस बार भी सी-डॉट ने अपने स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में दूरसंचार और आईसीटी के नए उभरते आयामों से संबंधित विषयों पर तकनीकी कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन किया। हालांकि, कोविड महामारी होने के चलते इस साल सी-डॉट ने जीबी मीमांसी व्याख्यान श्रृंखला 2021 के हिस्से के रूप में वर्चुअल तरीके से अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में दुनिया भर के कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों, दूरसंचार दिग्गजों और शिक्षाविदों ने भविष्य की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों पर अपने व्यावहारिक अनुभव और गहन ज्ञान को साझा किया।
दूरसंचार सचिव एवं डिजिटल संचार आयाेग के अध्यक्ष अंशु प्रकाश ने इसका शुभारंभ करते हुये इंजीनियरों को बीएसएनएल नेटवर्क में सी-डॉट 4जी एलटीई कोर के प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) की दिशा में सफलतापूर्वक लगातार काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की चुनौतीपूर्ण संचार जरूरतों को पूरा करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रधान मंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने के दिशा में सी-डॉट द्वारा 5जी एनएसए और एसए के स्वदेशी विकास के लिए यह एक बहुत ही उपयुक्त समय है। यह कार्यक्रम डिजिटल संचार आयोग के अध्यक्ष द्वारा सी-डॉट के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) लैब का शुभारंभ का भी गवाह बना। इस लैब में प्रभावशाली आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक चेतावनी और आपातकालीन स्थितियों में खतरे की सूचना के लिए एनडीएमए द्वारा अखिल भारतीय एकीकृत चेतावनी प्रणाली का विकास और कार्यान्वयन किया जाएगा।

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