May 9, 2021

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मुख्यमंत्री योगी ने छत्रपति शिवाजी को पुण्यतिथि पर किया नमन, कहा-निर्भीक-स्वातंत्र्य प्रिय व्यक्तित्व प्रेरणादायी

प्रदेश के अन्य नेताओं ने भी दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

लखनऊ:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रदेश के अन्य नेताओं ने महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को कहा कि मां भारती के अमर सपूत, ‘हिन्दवी स्वराज’ के संस्थापक, राष्ट्रनायक, अतुल्य पराक्रमी, कुशल शासक एवं महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रक्षा को समर्पित छत्रपति शिवाजी का निर्भीक एवं स्वातंत्र्य प्रिय व्यक्तित्व हम सभी के लिए महान प्रेरणा है। उप्र विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि “आत्मबल, सामर्थ्य देता है और सामर्थ्य, विद्या प्रदान करती है। विद्या, स्थिरता प्रदान करती है, और स्थिरता, विजय की तरफ ले जाती है।” शक्ति और शौर्य की पहचान, हिन्दवी स्वराज के संस्थापक महान योद्धा छत्रपती शिवाजी महाराज जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि त्याग, साहस और शौर्य के प्रतीक भारत के महान योद्धा एवं रणनीतिकार, मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपती शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक वीर शिरोमणि छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि! भााजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने ट्वीट किया कि साजि चतुरंग वीर रंग में तुरंग चढ़ि, सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं। ‘भूषण’ भनत नाद विहद नगारन के, नदी नद मद गैबरन के रलत है। महान पराक्रम पुरोधा शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन। भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल ने कहा कि महान योद्धा, कुशल रणनीतिकार एवं महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन। छत्रपति शिवाजी महाराज देश के वीर सपूतों में से एक थे, जिन्हें ‘मराठा गौरव’ भी कहते हैं। वर्ष 1674 में उन्होंने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। उन्होंने कई सालों तक मुगलों से संघर्ष किया था और उन्हें धूल चटाई थी। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को मराठा परिवार में हुआ था। वहीं 1680 में आज के ही दिन बीमारी की वजह से छत्रपति शिवाजी की मृत्यु अपनी राजधानी पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में हो गई थी। शिवाजी महाराज की गौरव गाथा आज भी लोगों को सुनाई जाती है।

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