January 21, 2021

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मिट्टी का तावा, कड़ाही और अन्य बर्त्तनों ने बदली जिन्दगी

मिट्टी के आकर्षक बर्त्तनों , मूर्तियां, और सामनों की मांग बढ़ी

रांची:- आत्मनिर्भर भारत आह्वान के बाद से स्थानीय उत्पाद और उत्पादकों के प्रति देश का नजरिया बदला है।मिट्टी के काम से जुड़ा रांची में भी एक ऐसा परिवार है जिसके चौखट पर खुशियों ने दस्तक दी है।
रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड अंतर्गत पांचा गांव की सावित्री देवी और उनका पूरा परिवार चाक के माध्यम से मिट्टी को शक्ल देने का काम करता है। सावित्री देवी को इस काम में अपने पति और बहुओं का भी सहयोग मिलता है। बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए सभी के सहयोग से वे मिट्टी के घड़े, तावा, कड़ाही, हांडा और धार्मिक कार्यों में उपयोग के लिए बर्तन बनाती है। मिट्टी के कई आकर्षक बर्त्तन के अलावा मूर्तियां, फ्रिज और ऐसे सामान बनाये जा रहे है, जिसकी मांग बाजार में निरंतर बढ़ रही है।

महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुनरमंद सावित्री देवी और उनकी बहू कौशल्या देवी के जीवन में अब बदलाव भी देखने को मिल रहा है। बच्चों की पढ़ाई समेत अन्य खर्च करने के बाद इनमें बचत की भावना भी बढ़ी है। महिलाओं को आगे बढ़ाने में स्थानीय स्तर पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, जेएसएलपीएस का भरपूर सहयोग मिल रहा है। सोसाइटी की रश्मि कुमारी बताती है कि बैंक लिंकेज के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है ताकि वे अपने काम को बड़े पैमाने पर कर सके।
केंद्र सरकार की ओर से लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने का मंत्र जब से उद्यमियों को मिला है तब से वह निरंतर विकास के पथ पर चल रहे हैं। इस दिशा में सावित्री देवी और उनका परिवार एक अच्छा उदाहरण पेश कर रहा है।

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