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चीन ने अफगान राजदूत की बेटी के अपहरण को लेकर पाकिस्तान को सुनाई खरी-खोटी

बीजिंगः- चीन ने अफगानिस्तान के राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी का इस्लामाबाद में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण और हमले की सोमवार को कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान को खऱी-खरी सुनाई है। चीन ने उम्मीद जतायी कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। पाकिस्तान में अफगानिस्तान के राजदूत नजीबुल्ला अलीखिल की 26 वर्षीय बेटी सिलसिला अलीखिल का शुक्रवार को इस्लामाबाद में अज्ञात लोगों ने ‘अपहरण किया”,‘‘प्रताड़ित किया” और उसके साथ ‘‘मारपीट” की। सिलसिला अलीखिल को उस वक्त अगवा किया गया जब वह किराये के वाहन से कहीं जा रही थीं। रिहा करने से पहले उन्हें कई घंटे बंधक बनाए रखा गया।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने यहां एक मीडिया ब्रीफिंग कहा, ‘‘जहां तक पाकिस्तान में अफगान राजदूत की बेटी के अपहरण का सवाल है, हम इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं। चीन को उम्मीद है कि पीड़िता बहुत जल्द ठीक हो जाएगी और हमें उम्मीद है कि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।” उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इस्लामाबाद द्वारा परोक्ष तौर पर सैन्य समर्थन की खबरों के बीच तालिबान द्वारा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर नियंत्रण करने का दावा करने के बाद इस सीमा को फिर से खोलने के लिए दोनों देश सम्पर्क एवं सहयोग के जरिये अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण कर सकते हैं।
इस घटना के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है। इस्लामाबाद ने “परामर्श” के लिए काबुल में अपने राजदूत को भी वापस बुलाया। पाकिस्तान और अफगानिस्तान सरकार के बीच बढ़ते मतभेद बीजिंग को चिंतित कर रहे हैं क्योंकि चीन दोनों देशों के बीच सुलह करने की कोशिश कर रहा है। तालिबान के अफगानिस्तान के इलाकों पर नियंत्रण के बीच अमेरिका ने घोषणा की कि वह अपने सैनिकों को 31 अगस्त से पहले वापस बुला लेगा। सोमवार को अपनी ब्रीफिंग में, झाओ ने पाकिस्तान तालिबान और अफगान तालिबान के बीच अंतर करने का प्रयास किया और कहा कि दोनों संगठन अलग हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तानी तालिबान एक आतंकवादी है और पाकिस्तानी सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह व्यापक रूप से मानते हैं। इसने क्वेटा होटल में विस्फोट सहित कई आतंकवादी हमलों में शामिल होने की बात स्वीकार की है।” उन्होंने कहा, ‘‘अफगान तालिबान खुद को एक राजनीतिक और सैन्य संगठन बताता है और उसने खुले तौर पर घोषित किया है कि वह किसी भी संगठन या व्यक्ति को अन्य देशों को धमकी देने के लिए अफगान क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। इस साल, इसने अफगान सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत और संपर्क बनाए रखा है।”

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