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बच्चों की पढ़ाई अधूरी न रह गये, शिक्षकों ने एक साल का मासिक शुल्क अपने वेतन से जमा कराया
गुरु-शिष्य परंपरा प्ररेणादायक पहल


रांची:- शिष्य की परंपरा भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए रांची के एक सरकारी विद्यालय के शिक्षक और शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों के लिए विशेष पहल की है। रांची स्थित बालकृष्ण प्लस टू उच्च विद्यालय ने कोरोना काल के कारण उपजे आर्थिक संकट से जूझ रहे बच्चों और अभिभावकों के ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। विद्यालय की प्रिंसिपल दिव्या सिंह बताती हैं कि पैसों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई अधूरी न रह जाए इसके लिए अब तक सौ से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन और एक साल का मासिक शुल्क शिक्षकों की ओर से जमा किया गया है।
प्रिंसिपल दिव्या सिंह बताती है कि बच्चों के शैक्षणिक स्तर में गुणात्मक सुधार हो इसके लिए प्रयास लगातार जारी है। गाइडलाइन के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास सुचारू रूप से चल रहा है।
विद्यालय के दूसरे शिक्षक और शिक्षिकाएं भी बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। स्कूल के शिक्षक अखिलेश प्रसाद और निशा कुमारीं का मानना है कि निजी विद्यालयों की तर्ज पर सरकारी विद्यालय के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, इस दिशा में स्कूल प्रबंधन की ओर से विशेष प्रयास किया जा रहा है।
शिष्य के जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है। माना जाता है कि गुरु उस दिए की तरह होता है जो खुद जलकर अपने बच्चों को ज्ञान का प्रकाश देता है।

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