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इंकैब इंडस्ट्री के पुनरूद्धार को लेकर मुख्य सचिव ने की बैठक

विधायक सरयू राय भी थे उपस्थित

रांची:- जमशेदपुर की इंकैब इंडस्ट्री का पुनरूद्धार करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक झारखण्ड सरकार के मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में शुक्रवार को हुई। बैठक में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते, उद्योग सचिव पूजा सिंघल, निदेशक उद्योग जितेन्द्र कुमार सिंह उपस्थित थे। यह बैठक जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय की पहल पर आयोजित की गई थी। सरयू राय भी बैठक में उपस्थित थे।
बैठक में इंकैब की नीलामी करने के लिए एसीएलटी, कोलकाता द्वारा 7फरवरी 2020को दिये गये आदेश, इंकैब के कामगारों की अपील पर 5जून 2021 को एनसीआई एक्ट् द्वारा दिये गये आदेश, इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त द्वारा दिए गए प्रतिवेदन के विभिन्न पहलुओं पर विचार हुआ। निर्णय हुआ कि उद्योग निदेशक इस विषय में समस्त सूचनाएं एकत्र करेंगे और एक प्रतिवेदन देंगे कि सरकार इसमें किस तरह हस्तक्षेप कर सकती है, ताकि लोभी और जालसाज लोग पुनः इस कंपनी पर कब्जा करने की कोशिश नहीं करें। इंकैब के संबंध में आगे दो ही रास्ता रह गया है। एक, यह इंडस्ट्री नीलाम हो जाय और दूसरा इसके पुनरूद्धार का प्रयास हो। कंपनी को नीलामी से बचाने और पुनरूद्धार के रास्ते पर ले जाने के लिए राज्य सरकार की जो भी भूमिका कंपनी कानून के अंतर्गत हो सकती है, जनहित में वह भूमिका सरकार निभाने के लिए तैयार है।
कंपनी की कितनी परिसम्पतियाँ हैं और कम्पनी पर कितनी देनदारी हैं, इस बारे में भी उद्योग निदेशक वास्तविक जानकारी एकत्र करेंगे। विधायक सरयू राय ने कहा कि जिस तरह से कंपनी की परिसम्पतियों को 1995 के बाद से लोभी और धोखेबाज पूंजीधारकों ने लूटा है, उस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा कि इस बारे में जमशेदपुर के इंकैब कामगारों ने उसके प्लांट मशीनरी की चोरी के बारे में गोलमुरी थाना में एक एफआईआर दर्ज किया था, उस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सरयू राय ने बैठक में अपनी तरफ से मुख्य सचिव को संबोधित एक प्रस्ताव रखा, जिस पर चर्चा हुई और मुख्य सचिव ने इसे उद्योग सचिव पूजा सिंघल को सौंप दिया। उद्योग निदेशक इंकैब में स्थित 177 एकड़ जमीन का इसके पुनरूद्धार में क्या उपयोग हो सकता है, इसके बारे में भी जानकारी एकत्र करेंगे। पूजा सिंघल ने बताया कि 2016 में जो औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन नीति सरकार ने बनाया था, उसकी समय-सीमा समाप्त हो गई है। शीघ्र ही वर्तमान सरकार इस सबंध में नई प्रोत्साहन नीति को अंतिम रूप देगी, तभी इसके अनुसार सरकार इंकैब की पुनरूद्धार के लिए आवश्यक कदम बढ़ा सकती है।

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