May 13, 2021

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मां दुर्गा की उपासना का त्योहार चैती नवरात्र शुरू

पटना:- वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर के बीच बिहार में शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की उपासना का त्योहार चैती नवरात्र आज से शुरू हो गया।
कोरोना संक्रमण के कारण इसबार देवी मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर रोक है। ऐसे में भक्त घरों में कलश स्थापना कर अनुष्ठान कर रहे हैं। प्रशासन और मंदिर के पुजारियों ने लोगों से अपील की है कि भक्त घर में ही रहकर मां की आराधना करें। मां इस कोरोना का विनाश करने के साथ ही भक्तों की मनोकामना जरूर पूर्ण करेगी।
शुभ मुहुर्त में विधि विधान से नवरात्र आराधना को लेकर कलश की स्थापना कर पूजा शुरू की गई। इसके साथ ही मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का नौ दिवसीय अनुष्ठान आज से शुरू हो गया। घरों और मंदिरों में पूजा-पाठ एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरु हो गया। चैत्र नवरात्र को लेकर सुबह होते ही लोग पूजा की तैयारी में लग गये। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान भी किया। इस व्रत को करने वाले लोगों ने घर की साफ-सफाई पूरी करने के बाद कलश स्थापना की। नवरात्र के पहले दिन भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जा रही है। नवरात्र के पहले दिन ही मां शैलपुत्री की आराधना में पटना आसपास के इलाके के लोग सुबह से ही भक्ति में लीन रहे। मंदिरों तथा घरों में कलश स्थापना के साथ देवी दुर्गा की आराधना शुरू हो गई है।
बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने विक्रम संवत्सर-2078 की शुरुआत एवं चैत्री वासंती नवरात्र के मंगलमय अवसर पर देश और प्रदेश के लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। श्री चौहान ने अपने शुभकामना संदेश में कहा, “नववर्ष और चैत्री नवरात्र सबके लिए आनन्द, समृद्धि और शांतिदायक हों, मेरी यह शुभकामना है।” राज्यपाल ने मंगलकामना की है कि मां दुर्गा और भगवान श्रीराम की पूजा-आराधना और भक्ति-भावना से जुड़ा नवरात्र पर्व, समाज में सुख, शांति और बंधुत्व विकसित करे ताकि देश की राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भावना एवं समरसता सुदृढ़ और सशक्त बन सके। आज से नौ दिनों तक माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।अपने पहले स्वरूप में मां ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त होते हैं। नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं। मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्र में तीसरे दिन इनकी पूजा होती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है, जिससे इनका यह नाम पड़ा। इस देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव दूर होते हैं।
नवरात्र पूजन के चौथे दिन देवी के कूष्मांडा के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था। उनकी आठ भुजाएं हैं। मां कूष्मांडा की पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है। नवरात्र का पांचवां दिन स्कंदमाता की पूजा का होता है। माना जाता है कि उनकी कृपा से मूर्ख भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से जाना जाता है। ये बुध ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करती हैं।
मां दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। इनकी उपासना से भक्तों को आसानी से धन, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महर्षि कात्यायन ने पुत्री प्राप्ति की इच्छा से मां भगवती की कठिन तपस्या की तब देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका यह नाम पड़ा। दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। कालरात्रि की पूजा करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुल जाते हैं और सभी असुरी शक्तियों का नाश होता है। देवी के नाम से ही पता चलता है कि इनका रूप भयानक है।
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। उनकी आयु आठ साल की मानी गई है। उनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद होने की वजह से उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है। इस देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। नवरात्र पूजन के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वालों को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री की कृपा से ये सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं। मां सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं।

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