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कैग रिपोर्ट में हुआ खुलासा, 42 में से 8 पुल हुए क्षतिग्रस्त


चतरा के तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी ने रोकड़िया की मदद से 13.58करोड़ का गबन किया
रांची:- झारखंड की प्रधान महालेखाकार इंदू अग्रवाल ने 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों सहित सामान्य, सामाजिक, आर्थिक और राजस्व प्रक्षेत्रों से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कई अनियमितता और गड़बड़ी की बात सामने आयी है।
राज्य की प्रधान महालेखाकार इंदू अग्रवाल ने गुरुवार बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत किए गए कार्यों में अनेक खामियां पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2019 तक राज्य के 208 अधूरे पुल निर्माण कार्यामें से 39 पुलों का निर्माण उनके पूर्ण होने की निर्धारित अवधि के छह महीने से साढ़े नौ वर्ष बीतने के बावजूद पूरा नहीं हो सका। जबकि विभाग के पास विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को तैयार करने के लिए परामर्शियों को नियुक्ति के लिए कोई मार्गनिर्देशिका नहीं थी। जिसके कारण सूचीबद्ध परामर्शियों के कार्यां की समीक्षा, स्वतंत्र संस्था डीपीआर की समीक्षा के अभाव के कारण परामर्शियों को अनुचित लाभ दिया गया। कैग द्वारा छानबीन में 42 में से 52.12करोड़ की लागत से बने आठ पुल बाद में पूर्ण अथवा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गये।
प्रधान महालेखाकार ने बताया कि तात्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी, चतरा द्वारा रोकड़िया की मदद से 13 करोड़ 58 लाख रूपये का गबन किया गया। यह राशि डीबीटी के माध्यम से लाभुकों तक पहुंचने थे।
इंदु अग्रवाल ने बताया ऐसा नहीं है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में जो खामियां पाई गई हैं,वह सभी गलत मंशा से की गई हैं। बल्कि, सही कार्ययोजना और देखरेख के अभाव मे भी बहुत सारी गलतियां हुई हैं। उन्होंने बताया कि फर्जी बैंक जमानत और फर्जी होने का संदेहास्पद मुख्तारनामा के आधार पर कार्य आवंटन होने के कारण 13.24 करोड़ रुपये का कपटपूर्ण भुगतान तथा सरकारी धन के नुकसान की बात सामने आयी है।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने निर्धारित न्यूनतम मात्रा के अठाव को सुनिश्चित करने के लिए कोई कार्रवाई की, जिसके कारण अप्रैल 2016 से जुलाई 2017 के बीच चार उत्पाद जिलों में 406 डीलरों द्वारा शराब का कम उठा किया गया, जिससे उत्पाद शुल्क 22.46 करोड़ रुपये के हानि के समतुल्य अर्थदंड की वसूली नहीं की सकी।
महालेखाकार की ओर से प्रतिवेदन की प्रति बुधवार को विधानसभा के पटल पर रख दी गई है। प्रतिवेदन में दिए गए बिंदुओं के आधार पर समय रहते कई खामियों को न सिर्फ दूर किया जा सकता है,बल्कि, इसके दूरगामी बड़े नुकसान से बचा भी जा सकता है।

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