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एक बुजुर्ग महिला बुधनी देवी ने मरणोपरांत अपने नेत्र दान कर एक जिंदगी को रोशन कर बन गई चतरा जिले की मिसाल


चतरा:- नेत्रदान सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि इस दान से दो जिंदगिया रौशन होती है। जिंदगी भर जिस शख्श ने कभी दुनिया नही देखी और केवल अंधेरे में ही जिया हो, उनकी आखों में रौशनी आ जाए तो इससे खुशी की बात और क्या हो सकती है। धीरे-धीरे ही सही लेकिन समाज नेत्रदान के प्रति जागरूक हो रहा है। लोग चाहते है कि मृत्यु पश्चात भी लोगों का भला करें। इसलिए मरणोपरात नेत्रदान की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसा ही एक पुण्य का कार्य चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड में हुआ है।
रामचरित्र मानस की प्रसिद्ध चौपाई “रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाई पर वचन न जाई“ आज के दौर में यह भले ही गुम हो गई हो। लेकिन एक बुजुर्ग महिला ने अपने मरणोपरांत इस प्रसिद्ध चौपाई को न सिर्फ चरितार्थ किया, बल्कि आंखों से नहीं देख पाने वाले दो इंसानों की अंधेरी दुनिया को रौशन कर ग‌ई। दरअसल चतरा जिले में पड़ने वाले पत्थलगडा प्रखंड के पारा शिक्षक चुरामन प्रजापति की 84 वर्षीय माता बुधनी देवी के निधन के बाद परिजनों ने उनके नेत्र को दान कर किसी की जिंदगी में उजियारा लाने का निर्णय लिया। इस पर रांची रिम्स अस्पताल आ‌ई बैंक के नेत्र चिकित्सकों की टीम ने उनके निवास पर पहुंचकर दिवंगत बुधनी की दोनों आंखों का कार्निया निकाल कर अपने साथ ले ग‌ए। बताते चले कि बीते मंगलवार को बुधनी देवी का निधन हो गया। वह 84 साल की थी। बुजुर्ग महिला ने अपने 17 वर्ष की उम्र में ही नेत्रदान करने का फैसला ले लिया था। इसके लिए वह अपने पुत्रों व परिजनों को अनुरोध भी किया था कि उनकी मृत्यु के बाद उसकी दोनों आंखे दान करने के बाद ही उनका अंतिम संस्कार किया जाये। माता का आदेश का पालन करते हुए उनके निधन के बाद परिजनों ने जनहित में बड़ी पहल करते हुए उनके नेत्रदान करने का निर्णय लिया। इसकी खबर स्थानीय नेत्र चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार को दी गई। डॉ. अशोक कुमार की मदद से रिम्स अस्पताल से आई बैंक के मैनेजर अभिमन्यु कुमार अपनी टीम के साथ पत्थलगडा पहुंचे। उनके टीम में सुमन कुमार, सत्य प्रवेश कुमार व तूफान कुमार शामिल थे। नेत्र अधिकोष विभाग के नोडल अधिकारीयों की टीम ने पत्थलगडा स्थित मृतक बुधनी के निवास पर पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर से पूर्ण सम्मान के साथ उनके दोनों आंखों का कॉर्निया निकाल कर रिम्स अस्पताल ले ग‌ए।
रिम्स के आइ बैंक के मैनेजर अभिमन्यु कुमार ने बताया कि दिवंगत महिला के पार्थिव शरीर से दोनों आखों के कार्निया निकालकर आई कंटेनर में रखा गया। इसके बाद कंटेनर को कोल्ड चेन में डाला गया। कार्निया को 4 डिग्री तापमान में रखने का नियम है। इसके बाद आई कंटेनर को बुधवार को रिम्स के लिए भेज दिया गया।
नेत्र चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि मृतक के परिजन की सहमति से नेत्रदान किया जा सकता है। यह बेहतर कार्य पत्थलगडा के एक परिवार ने कर दिखाया है। यह बहुत सराहनीय कदम है। उन्होंने बताया कि आइ कंटेनर के माध्यम से कार्निया को रांची स्थित सिम्स के लिए भेजा गया है। यह 72 घंटे के अंदर किसी जरूरतमंद को लगाया जाएगा और वह पूरी दुनिया देख सकेगा।
बुधनी की आंखें मौत के बाद भी सब कुछ देखेंगी। सुनने में जरा अटपटा लग रहा है, परंतु यह सोलह आने सच है। लोग कहते हैं कि मौत के बाद कुछ देख नहीं सकते, परंतु बुधनी की आंखें सबकुछ देख ही नही सकेगी, बल्कि दो इंसानों की अंधेरी दुनिया को रोशन भी करेंगी। पत्थलगडा के पारा शिक्षक चुरामन प्रजापति के 84 वर्षीय बुजुर्ग माता बुधनी देवी दुनिया से अलविदा होते हुए भी दो इंसानों की अंधेरी दुनिया को भी रोशन कर गई है। मौत के बाद भी दिवंगत बुधनी देवी द्वारा कमाया गया पुण्य चहूंओर चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने जीवन काल में लिए गए वचन को बुधनी ने मरणोपरांत निभाया और नेत्रदान कर आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी। स्थानीय लोग बताते हैं कि नेत्रदान की खबरें तो सुने थे लेकिन नेत्रदान करते किसी को देखा नहीं था। पहली बार किसी महिला को नेत्रदान करते देखा। बुजुर्ग महिला की नेत्रदान से स्थानीय लोग भावुक हैं। आई बैंक के मैनेजर और रिम्स के चिकित्सकों ने बुजुर्ग महिला के पुत्र को नेत्रदान का प्रमाण पत्र सौंपा तो वहां उपस्थित लोग भावुक हो गए। महिला के पुत्र व पारा शिक्षक चुरामन प्रजापति बताते हैं कि उनकी मां पूर्व में ही नेत्रदान करने का संकल्प की थी। मरते वक्त भी उन्होंने नेत्रदान संकल्प को दोहराया। हम परिजन केवल मां की आज्ञा का पालन किए हैं। उन्होंने कहा कि मां के नेत्रदान के पुण्य से आत्मबल मिला है।
रिम्स के आई बैंक के मैनेजर अभिमन्यु कुमार ने बताया कि दिवंगत बुधनी देवी के निधन पर उनके परिजन द्वारा नेत्रदान करने का फैसला चतरा जिले में पहला है। इससे पूर्व अब तक नेत्रदान करने का फैसला पुरे जिले में किसी ने नहीं लिया है।

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