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मनरेगा में जीवन और जीविका दोनों है सुरक्षित”-मनरेगा आयुक्त


सभी जिलों को अनुग्रह अनुदान की राशि के भुगतान का निर्देश
रांची:- झारखंड में मनरेगा मजदूरों के लिए न सिर्फ जीविका का साधन है बल्कि उनके जीवन को भी सुरक्षित कर रहा है। मनरेगा आयुक्त राजेश्वरी बी ने सभी जिलों के उप विकास आयुक्तों को पत्र के माध्यम से निर्देशित किया है कि अधिकतम 65 वर्ष तक के आयु के जिन मजदूरों के द्वारा किसी वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 15 दिनों तक मनरेगा अंतर्गत कार्य किया गया है, उनका उस वित्तीय वर्ष तथा उसके अगले वित्तीय वर्ष में मृत्यु अथवा दुर्घटना में मृत्यु अथवा अप्राकृतिक मृत्यु (हत्या सहित) अथवा अंग भंग हो जाने पर उनके वैध उत्तराधिकारी- दुर्घटना से पीड़ित श्रमिक को अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान किए जाने का प्रावधान है । इसके लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए अनुग्रह अनुदान हेतु राज्य कोष से कुल 10 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है ।राज्य में मनरेगा जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी के तर्ज पर काम कर रहा है। इससे जुड़े मजदूरों को राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जा रहा है। इन्हें ना सिर्फ 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी है, बल्कि प्रदेश की सरकार इनके साथ खड़ी है। इनके हर सुख दुख में सहभागी बन रही है। यही कारण है कि ”जीविका भी, जीवन भी” मंत्र के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। इस योजना से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की पहल की गई है। राज्य सरकार ने मनरेगा योजना के तहत राज्य के ग्रामीण एवं प्रवासी श्रमिकों को उनके गांव व टोला में ही रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मनरेगा आयुक्त के द्वारा बताया गया कि मनरेगा योजना अंतर्गत कार्य करने वाले श्रमिक राज्य के निर्धनतम परिवार के लोग होते हैं । ऐसे किसी श्रमिक की प्राकृतिक मृत्यु अथवा अप्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो जाने पर परिवार की आर्थिक स्थिति बिलकुल दयनीय हो जाती है तथा इन्हें केंद्र सरकार द्वारा किसी प्रकार का अनुग्रह अनुदान का लाभ नहीं दिया जाता है । ऐसी स्थिति में निर्णय लिया गया है कि अधिकतम 65 वर्ष तक के आयु के जिन मजदूरों के द्वारा किसी वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 15 दिनों तक मनरेगा अंतर्गत कार्य किया गया है, उनका उस वित्तीय वर्ष तथा उसके अगले वित्तीय वर्ष में मृत्यु अथवा दुर्घटना में मृत्यु अथवा अप्राकृतिक मृत्यु (हत्या सहित) अथवा अंग भंग हो जाने पर निम्न प्रकार से अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान उनके वैध उत्तराधिकारी- दुर्घटना से पीड़ित श्रमिक को किया जाएगा ।
इसके तहत . दुर्घटना में मृत्यु अथवा अप्राकृतिक मृत्यु (हत्या सहित) होने अथवा स्थायी रूप से विकलांग- अंग भंग हो जाने पर राशि 75,000, दुर्घटना में आंशिक रूप से विकलांग होने पर राशि रुपए 37,500, सामान्य मृत्यु होने पर राशि 30,000, मनरेगा योजना अंतर्गत निर्मित डोभा में डूबकर मरने वाले मृतकों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान का भुगतान के रूप में 50,000 देने का प्रावधान है।
मनरेगा आयुक्त ने सभी जिलों के उप विकास आयुक्तों को एक सप्ताह के अंदर ऐसे सभी मृत श्रमिक- दुर्घटना से पीड़ित श्रमिकों को चिन्हित कर सूची विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है तथा यह भी निर्देश दिया गया है कि ऐसे किसी प्रकार की घटना होने पर तुरंत विस्तृत स्थानीय जाँच किया जाय तथा मामला सही पाये जाने पर 24 घंटे के अंदर आश्रित- पीड़ित को राशि उपलब्ध कराई जाय ।
राज्य सरकार राज्य के मजदूरों को उनके घर में ही रोजगार उपलब्ध करा रही है। यही कारण है कि बाहर से आने वाले मजदूर भी अब राज्य में ही मनरेगा से जुड़कर काम कर रहे हैं । उन्हें सरकार पर पूरी तरह से भरोसा है कि उन्हें हर हाल में 100 दिन का रोजगार मिलेगा। कोविड-19 के संक्रमण के बाद मजदूरों ने भी राज्य में ही रोजगार की तलाश शुरू कर दी है। वह गांव से जुड़ी योजनाओं में शामिल होकर न सिर्फ गांव की तस्वीर बदल रहे हैं, बल्कि अपनी तकदीर भी खुद लिख रहे हैं। इस काम में सरकार उनके साथ खड़ी है और उन्हें उनके रोजगार के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2021- 22 में अब तक कुल 19.45 लाख मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया गया है तथा 467 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं। हर इच्छुक परिवार व मजदूर को यथासंभव उनके गांव और टोला में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक गांव टोला में कम से कम 5 से 6 योजनाओं के क्रियान्वयन का लक्ष्य सरकार ने तय किया है। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा शुरुआत की गई योजनाओं यथा नीलाम्बर- पीताम्बर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना, वीर शहीद पोटो हो खेल योजना, दीदी बाड़ी योजना आदि के क्रियान्वयन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इन योजनाओं में सभी श्रमिकों को ससमय रोजगार उपलब्ध कराते हुए गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्तियों के निर्माण पर बल दिया जा रहा है। सभी इच्छुक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई उक्त सभी योजनाओं के समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। वहीं जल संरक्षण एवं पौधरोपण कार्य को मिशन मोड में वैज्ञानिक ढंग से क्रियान्वित कराया जा रहा है।

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