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कांवरिया पथ पर नहीं गूजेंगे बोल बम के जयकारे


भागलपुर:- कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण से जूझ चुके लाखों लोगों ने बाबा भोलेनाथ से प्राणों की रक्षा करने की प्रार्थना की होगी और ठीक हो जाने पर सावन में उनका जलाभिषेक करने की मन्नत भी मांगी होगी लेकिन सरकार से अनुमति नहीं मिलने के कारण बिहार के सुल्तानगंज से झारखंड के देवघर के बीच लगभग 110 किलोमीटर के कांवरिया पथ पर इस बार भी बोल बम के जयकार नहीं गूजेंगे। बिहार सरकार के अनलाॅक-4.0 के तहत सार्वजनिक रूप से धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक और धार्मिक स्थलों को बंद रखने के निर्देश की वजह से भागलपुर जिला प्रशासन ने सुल्तानगंज में इस बार भी एक माह तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सुल्तानगंज में प्रवाहित उत्तरवाहिनी गंगा घाटों पर दंडाधिकारियों के साथ पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है। ऐसे में जहां एक ओर लाखों कांवरियों को अपने-अपने घरों में ही बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना करनी होगी और प्रार्थना करनी होगी कि बाबा बैद्यनाथ लोगों को इस महामारी से निजात दिलाएं ताकि वह अगले वर्ष बाबा धाम जाकर उनका जलाभिषेक कर सकें। वहीं, इस मेले से जुड़े दो राज्यों के हजारों परिवारों को लगातार दूसरे वर्ष भी आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ेगी। भागलपुर के धर्मवेत्ता गिरधारीलाल जोशी कहते हैं कि इस मेले की एक अनूठी बात यह है कि यहां बड़े-छोटे, अमीर-गरीब और ऊंच-नीच सभी का भेदभाव मिट जाता है और दुर्गम यात्रा करने वाले कांवर श्रद्धालुओं पर बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा रहती है। लेकिन, वर्ष 2020 से कोरोना महामारी की वजह से दोनों स्थलों (सुल्तानगंज और देवघर) पर इस मेले के आयोजन पर रोक लगाये जाने के कारण इस बार भी कांवरियों के जनसैलाब के उमड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 26 जुलाई से सावन मास आरंभ हो रहा है लेकिन सुल्तानगंज और कांवरिया पथ पर मेले की चहलकदमी की बजाय चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है।
इस बीच भागलपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि कोरोना के मद्देनजर सरकार के अनलाॅक-4.0 के नियम और निर्देशों के बाबत इस बार भी मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा है और इस सिलसिले में सुल्तानगंज के नगर परिषद एवं प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि खासकर, सभी गंगा घाटों और इस ओर पहुंचने वाले मार्गों पर विशेष नजर रखी जा रही हैं। बहरहाल, पूरे सावन माह तक चलने वाले इस मेले का इस बार भी आयोजन नहीं होने से चारों तरफ सन्नाटा है। वहीं, श्रद्धालुओं के साथ-साथ मेले से जुड़े आम लोगों में भी मायूसी देखी जा रही है। उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अवस्थित जिले के सुल्तानगंज में देश-विदेश से आने वाले लाखों गेरुआ वस्त्रधारी कांवरियों का जत्था यहां अपने कांवर में पवित्र जल भरकर देवघर स्थित बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए प्रस्थान करता रहा है। सुल्तानगंज से देवघर तक निर्मित कच्चे कांवरिया पथ से बड़े-छोटे सभी कांवरिया करीब एक सौ दस किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान सम्पूर्ण मार्ग गेरुआधारी कांवरियों से पट जाता है और उनके बोल बम व हर हर महादेव के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

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