June 17, 2021

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बीजेपी टीएसी नियमावली पर बरगालने की कोशिश कर रही है-जेएमएम

रांची:- झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने ने बताया कि साल 2006 में छत्तीसगढ़ में नव निर्वाचित रमन सिंह सरकार द्वारा लिये गये फैसले का हवाला देते हुए बताया कि टीएसी नियमावली में बदलाव किया गया था। इस फैसले के खिलाफ पहले तो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी, लेकिन दोनों ही बार याचिकाकर्ता को मुंह की खानी पड़ी। उसी के तहत झारखंड में भी बदलाव किया गया।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने तो पहले तो टीएसी की नई नियमावली को लेकर कहा कि राज्य सरकार का सारा कामकाज राज्यपाल के नाम पर ही होता है। राज्यपाल ही राज्य की मुखिया हैं। उनकी मर्जी के मुताबिक ही नई नियमावली लाई गयी है। लेकिन अब बीजेपी राज्यपाल को बरगला रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी जान-बूझकर मामले को तूल देने की कोशिश कर रही है ताकि राज्य शासन की व्यवस्था को बिगाड़ा जा सके।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हेमंत सरकार का गठन साल 2019 में हुआ था। तब टीएसी के गठन को लेकर 2 बार सरकार ने राज्यपाल के पास सदस्यों के नामों की सूची भेजी थी। दोनों ही बार राज्यपाल ने नामों पर आपत्ति जताते हुए सूची को वापस कर दिया। ये तब हुआ जबकि संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा है कि राज्यपाल अपनी शक्तियों का इस्तेमाल मंत्रीपरिषद की सलाह के बिना नहीं कर सकती। बावजूद इसके राज्यपाल का निर्णय ये संकेत दे रहा है कि वो नई सरकार के गठन से खुश नहीं है।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि ट्राइबल एडवाइजरी कमिटी का अध्यक्ष एक आदिवासी ही हो सकता है, बावजूद इसके विगत पांच वर्षों में बीजेपी के एक गैर आदिवासी मुख्यमंत्री टीएसी की की बैठकों की अध्यक्षता करते रहे लेकिन राज्यपाल ने नहीं रोका। राज्य पांचवी अनुसूची के अंतर्गत एक राज्य है। आदिवासी कवच को बचाने का काम कर रहा है तो बीजेपी के नेताओं को तकलीफ होने लगती है।

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