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बीजेपी विधायक अमर बाउरी सदन से रोते हुए बाहर निकले, सत्तापक्ष ने कहा-घड़ियाली आंसू ना बहायें


रांची:- मॉनसून सत्र के अंतिम दिन बीजेपी के विधायक अमर कुमार बाउरी रोते हुए सदन से बाहर निकले। वे सदन की कार्यवाही के दौरान कार्यस्थगन प्रस्ताव ठुकराये जाने से आहत थे। उन्होंने कहा कि एक दलित विधायक के साथ स्पीकर का ऐसा बर्ताव कहीं से भी उचित नहीं हैं।
अमर कुमार बाउरी ने गुरुवार को विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके कार्यस्थगन प्रस्ताव को सत्ता के दवाब में आसन से रखने नही दिया गया। उन्होंने कहा कि स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से उन्होंने झारखंड विधानसभा में विशेष समुदाय को धार्मिक कारणों से कमरा आवंटन एवं नियोजन नीति में स्थानीय मूलवासी आदिवासी, दलित युवाओं को नौकरी से वंचित करने के षड्यंत्र पर सदन में चर्चा कराने की मांग की गयी थी। उन्होंने कहा कि इन दो सूत्री मांग के समर्थन में बुधवार को बीजेपी की ओर से किये जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस प्रशासन द्वारा जिस बर्बरतापूर्ण तरीके से लाठीचार्ज और आदिवासी महिला कार्यकर्त्ताओं का पुरुष पुलिसकर्मियों के द्वारा बाल नोचने तक की कार्यवाही की गई, उसे पूरी दुनिया ने देखा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे बीजेपी कार्यकर्त्ताओं पर सिर पर जान मारने की नियत से लाठियां बरसाई गई. इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को लक्ष्य करके जिस तरह से लाठियां भांजी गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश के हाथ को तोड़ा गया। इस बर्बरता पूर्ण कार्रवाई में लगभग 100 से ज्यादा निहत्थे कार्यकर्ताओं को गंभीर चोटें आयी।
इधर, विधायक प्रदीप यादव ने भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी संकल्प रखे जाने के बाद सदन का इस वायरल वीडियो की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों की ओर से मॉनसून सत्र के दौरान जिस तरह का व्यवहार किया गया, रिपोर्टर टेबुल पर चढ़ कर नाच किया गया, महिला रिपोर्टर को हटाकर उनकी कुर्सी पर चढ़ गया, स्पीकर पर सरकारी कागज फाड़ कर फेंका गया, आसन के प्रति अभद्र टिप्पणी और व्यवहार किया गया, इसके बावजूद स्पीकर की सज्जनता और सहनशीलता को दाद देना चाहिए कि उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपने समापन संबोधन में कहा कि जिस तरह का विपक्षी विधायक इस सत्र में किया गया, वैसी स्थिति में यदि कोई दूसरा स्पीकर होता, तो निश्चित रूप कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था।

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