January 16, 2021

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बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिये जाने की मांग को लेकर बीजेपी नेता राज्यपाल से मिलें

राज्य सरकार पर संवैधानिक मर्यादाओं के हनन का आरोप लगाया

रांची:- प्रदेश बीजेपी नेताओं के शिष्टमंडल ने शुक्रवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर पार्टी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिये जाने की मांग की।
राजभवन में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने के बाद बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में राज्य की हेमंत सोरेन सरकार संवैधानिक मर्यादाओं का हनन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास मे विपक्ष की बड़ी भूमिका होती है। बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी नेता प्रतिपक्ष का दर्जा हासिल करने की सारी अहर्ताएं रखते हैं, लेकिन मौजूदा सरकार उनको अपनी भूमिका निभाने मे रोड़े अटका रही है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्यपाल से मुलाकात के क्रम में राज्य की गिरती विधि व्यवस्था और कोरोना संक्रमण को लेकर बरती जा रही लापरवाही से भी राज्यपाल को अवगत कराया गया है।
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सरकार लोक लज्जा से काम करती है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के पास बार-बार जाने के बावजूद ऐसा महसूस हुआ कि सरकार के इशारे पर बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भाजपा के सभी 26 विधायकों ने एकमत से बाबूलाल मरांडी को अपना नेता मान लिया है और इसके बावजूद नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे को लेकर सरकार के इशारे पर इस मसले को टाला जा रहा है।
दीपक प्रकाश ने कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार में इस संकट से निपटने के लिए इच्छाशक्ति का अभाव है। सरकार सभी चीजों को राजनीतिक चश्मे को यह देखती है, यही कारण है कि जब बीजेपी विधायक दल के नेता दिल्ली जाते है और वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर दिल्ली से लौटते है, तो वापस लौटने पर 14 दिनों के होम क्वारंटाइन का मुहर लगा दिया जाता है, जबकि अधिकारियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि विधायिका के कार्य में लगे लोगों को लॉकडाउन में छूट दी गयी है। दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश सहप्रभारी उमंग सिंघार झारखंड आते है और लॉकडाउन में भी पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होते है, लेकिन सरकार उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेती है, ऐसा इसलिए होता है कि इसमें मुख्यमंत्री की भी सहमति होती है।

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