May 13, 2021

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बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था मरणासन्न स्थिति में : तेजस्वी

नीति आयोग के अनुसार स्वास्थ्य व्यवस्था के मामले में बिहार निचले पायदान पर

पटना:- बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय पर तंज कसा है।तेजस्वी ने कहा कि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था खुद मरणासन्न स्थिति में है और इसे लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की जो रिपोर्ट सामने आई है वह मेरी बातों को सही साबित करती है। नीति आयोग के मुताबिक बिहार स्वास्थ्य के क्षेत्र में सभी मानकों पर निचले पायदान पर है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को ट्वीट करते हुए लिखा,मैंने पूर्व में भी बिहार की मरणासन्न स्वास्थ्य व्यवस्था को आपके सामने और सदन के पटल पर रखा था। सीएजी की रिपोर्ट ने भी मेरी बातों का सत्य पाया है।नीति आयोग अनुसार बिहार स्वास्थ्य क्षेत्र के सभी मानकों पर निचले पायदान पर है। बिहार में 69 प्रतिशत डाक्टर, 92 प्रतिशत नर्स व 56 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है। 16 वर्षों से प्रदेश के मुखिया के रुप में नीतीश कुमार काम कर रहे हैं, लेकिन इन 16 वर्षों में न तो स्वास्थ्य और न ही शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अच्छा हो सका।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आईसीयू में पड़ी बिहार की मरणासन्न स्वास्थ्य सेवा के दोषी क्या सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, अकबर या फिर हड़प्पा काल को ठहरायेंगे? उन्होंने कहा मुख्यमंत्री से तार्किक और तथ्यात्मक सवाल मत पूछना अन्यथा वो ग़ुस्से से लाल-पीला होकर जंगलराज-जंगलराज चिल्लाएंगे। क्या कहती है सीएजी की रिपोर्ट सीएजी की ताजा रिपोर्ट में बिहार की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ा बताया गया है। रिपोर्ट में मेडिकल शिक्षा समेत कई विभागों की खामियां उजागर हो गईं। 12 मेडिकल कालेजों का निर्माण शुरू होने के बाद अब तक केवल दो ही मेडिकल कॉलेज संचालित हो सके। इसे आबादी के हिसाब से बेहद कम माना गया है।इनमें से एक रोहतास जिले में और एक पटना जिले के बिहाटा में है जिसके उद्घाटन में गत माह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल डॉ.मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार देश की कुल आबादी के 8.6 प्रतिशत के साथ तीसरा सबसे आबादी वाला राज्य है। एक लाख की आबादी पर सरकारी डॉक्टर-नर्स-प्रसाविका के अनुपात का राष्ट्रीय औसत 221 है। वहीं, बिहार में यह अनुपात 19.74 है। सीएजी ने रिपोर्ट में पाया है कि वर्ष 2006-07 से 2016-17 के बीच 12 मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य शुरु किया गया था, लेकिन केवल दो मेडिकल कॉलेज ही कार्यरत हो सके हैं। 61 के लक्ष्य की बजाय महज दो नर्सिंग संस्थानों का निर्माण हो सका है। बिहार सरकार के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में सीटों को भी बढ़ाने की कोशिश नहीं की गई। बिहार में एक लाख की आबादी पर फीजिशियन, आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक और नर्सों की 92 प्रतिशत तक सीटें खाली हैं। मेडिकल शिक्षा की सभी शाखाओं में टीचिंग स्टाफ की कमी 6.56 प्रतिशत और नॉन टीचिंग स्टाफ की कमी 8.70 प्रतिशत के बीच रही। पांच मेडिकल कॉलेजों में टीचिंग घंटों में भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की शर्तों के मामले में 14 से 52 तक कमी पाई गई है। टीचिंग ऑवर में कमी का कारण फैकल्टी का ना होना है।

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