January 26, 2021

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चतरा के तिलकुट की खुशबू से महक रही है बिहार की फिजा

चतरा:- वैसे तो अपने देश में धार्मिक दृष्टिकोण से अनेकों पर्व मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। किंतु इनमें मकर संक्रांति के त्यौहार की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। और जब खास तौर पर तिल सकरात की बात हो तो भला तिलकुट को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है। ऐसे भी सर्दी का मौसम हो और तिलकुट का स्वाद चखा न जाए, ये हो नहीं सकता। ऊपर से नए साल का आगमन। जबकि दूसरी ओर तिल के सेवन को औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण बताया गया है।
हम बात कर रहे हैं चतरा जिले में सजे दर्जनों अस्थाई तिलकुट के दुकानों की। जहां पर्व की आहट के साथ ही तिलकुट के बाजार गुलजार हो रहे हैं। और डिमांड इस कदर बढ़ती जा रही है कि दुकानदार इसकी पूर्ति नहीं कर पा रहे। जब तिलकुट की बात उठी गई है तो आज हम आपको यह भी बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। अगर हम यूं कहें कि चतरा के तिलकुट से बिहार के अलावा अन्य राज्यों के बाजार महक रहे हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं। चतरा के एक पुराने अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता अरुण यादव कहते हैं कि एक दौर था जब गया के बने तिलकुट के बिना लोग एक पल रह नहीं पाते थे। किंतु आज बिहार की फिजा में चतरा निर्मित तिलकुटों के स्वाद ने बहार ला दिया है।
द्वारा एक लंबे अरसे से उनकी अथक मेहनत द्वारा तैयार किए जा रहे तिलकुटों में शामिल चीनी, गुड़ व खोवा आदि व्यंजन से बने जबरदस्त उत्तम क्वालिटी के स्वादिष्ट तिलकुट तैयार किए जा रहे हैं। दुकानदार पप्पू कश्यप बताते हैं कि हमारी मेहनत ने रंग इस कदर दिखाई है कि अब हमारे तिलकुट की मांग दूसरे जिलों के साथ-साथ बिहार- बंगाल समेत अन्य राज्यों में भी होने लगी है। इससे चतरा में तिलकुट का कारोबार न सिर्फ फल फूल रहा है बल्कि यह एक उद्योग का भी रूप ले रहा है।
इधर दुकानों में दिन रात काम कर रहे तिलकुट बनाने वाले कारीगर आदित्य प्रसाद व भास्कर बताते हैं कि तिलकुट की मांग को देखते हुए 2 महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती है। कहते हैं कि अब बहुत दूर-दूर तक चतरा के तिलकुटों की मांग होने लगी है और वह अपने मेहनताना से अच्छी कमाई कर अपने परिवार का भी ठीक से भरण पोषण कर लेते हैं।
यह तो 100 फ़ीसदी सच है कि तिलकुट का नाम जेहन में आते ही खासकर गया बिहार के तिलकुट की याद ताजा हो जाया करती थी। किंतु आज के दौर में जहां चतरा में तिलकुट का बाजार काफी फल-फूल रहा है, वही यहां निर्मित तिल के व्यंजनों बिहार-बंगाल समेत अन्य राज्यों के तिलकुटों की मिठास को चौगुना कर दिया है।

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