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45 वर्ष से अपने जीर्णोद्धार की राह देख रहा बटेश्वर गंगा पंप नहर परियोजना


भागलपुर:- जिले कहलगांव अनुमंडल के बहुचर्चित बटेश्वर गंगा पंप नहर परियोजना आज 45 वर्ष बीतने के बाद भी चालू नहीं हो पायी है। बहुचर्चित बटेश्वर गंगा पंप नहर परियोजना की नींव 1977 में रखी गई थी। उस समय जब कहलगांव से लगातार कई बार विधायक रहे सदानंद सिंह बिहार सरकार के तात्कालीन जल संसाधन मंत्री थे। यह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सह कहलगांव विधायक सदानंद सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट था। नींव रखने से 45 वर्ष से अधिक हो जाने के बाद भी अभी तक इसका लाभ क्षेत्र के किसानों को नहीं मिल सका है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इसका उद्घाटन 2017 में किया गया था। उद्घाटन के दौरान ही पानी के अत्यधिक दबाव के कारण एनटीपीसी के पास नहर टूट गया, जिससे कहलगांव शहरी क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की स्थिति आ गई और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। विपक्ष द्वारा इस योजना में सरकारी पैसे की बंदरबांट एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई गई। उस समय के बाद पुनः कभी भी इसमें पानी नहीं छोड़ा गया। हाल ही में कहलगांव के नवनिर्वाचित भाजपा विधायक पवन कुमार यादव द्वारा मानसून सत्र के दौरान सदन में बटेश्वर गंगा पंप नहर परियोजना को शीघ्र चालू कराने के लिए मुद्दा उठाया गया।परियोजना के शुरुआत में इस योजना का कुल बजट 13 करोड़ 88 लाख रुपया था। लेकिन कार्य तय समय पर पूरा नहीं होने के कारण इस परियोजना की लागत बढ़ती चली गई और पूरी योजना 2,200 करोड़ रुपये की हो गई । बटेश्वर गंगा पंप नहर परियोजना से कहलगांव, सन्हौला और पीरपैंती प्रखंड के लगभग 21,700 हेक्टेयर और झारखंड के 4,883 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। परियोजना में 650 एचपी के 6 मोटर और 450 केवी के 6 मोटर लगाए गए हैं। एक साथ सभी बारह मोटर को चालू करने पर 1,260 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड लिया जा सकता है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अगर अभी भी बटेश्वर गंगा पंप नहर योजना शुरू हो जाती है, तो क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की समस्या का हद तक समाधान मिल जाएगा।

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